पावकरूपी राम है घटि-घटि रह्या समाइ मीनिंग
पावकरूपी राम है घटि-घटि रह्या समाइ हिंदी मीनिंग
पावकरूपी राम है, घटि-घटि रह्या समाइ।चित चकमक लागै नहीं, ताथै धूवाँ ह्वै-ह्वै जाइ॥
Pavakrupi Ram Hai, Ghati Ghati Rahya Samai,
Chitt Chakmak Lage Nahi, Tathe Dhuva Hve Hve Jai.
कबीर के दोहे का हिंदी मीनिंग (अर्थ/भावार्थ) Kabir Doha (Couplet) Meaning in Hindi
कबीर साहेब कहते हैं की चित्त/हृदय चकमक पत्थर की तरह से है और चकमक से अग्नि तभी उत्पन्न होती है जब उसे किसी अन्य पत्थर से रगड़ा जाता है, संघर्ष करवाया जाता है। इसी तरह, जब व्यक्ति का ध्यान इश्वर पर केंद्रित होता है, तो वह राम की उपस्थिति को महसूस कर सकता है। कबीर दास जी इस दोहे के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि राम का साक्षात्कार एक वास्तविक घटना है। यह एक ऐसी घटना है जो ध्यान और साधना के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। यदि चित्त में संत की शिक्षाओं से घर्षण ना हो, चोट ना लगे तो बस धुआ ही धुआ होता है अग्नि व्याप्त नहीं होती है. भक्ति रूपी अग्नि तभी प्रज्वल्लित होगी जब गुरु की शिक्षाओं से मान्यताओं और सिधान्तों पर चोट होती है.
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Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं कबीर के दोहों को अर्थ सहित, कबीर भजन, आदि को सांझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें। |
