तू राख भरोसो नाव तेरी तर ज्यासी

तू राख भरोसो नाव तेरी तर ज्यासी

तू राख भरोसो नाव तेरी तर ज्यासी

तू राख भरोसो,
नाव तेरी तर ज्यासी,
बीच भंवर न अटके नैया,
मैया पार लगासी रे।

सांचे मन से कर ले ध्यानना,
मैया आड़ी आसी,
मन का मैल मिटा ले प्राणी,
जीवन सुफल हो ज्यासी रे,
तू राख भरोसो,
नाव तेरी तर ज्यासी।

मां की महिमा बड़ी निराली,
दुखड़ा देख न पावे,
संकट आने से ही पहले,
मैया ही आ ज्यासी रे,
तू राख भरोसो,
नाव तेरी तर ज्यासी।

नाथ गुलाब जो शरण में आसी,
मैया का गुण गासी,
विनय भाव से भजन सुनासी,
भव सागर तर ज्यासी रे,
तू राख भरोसो,
नाव तेरी तर ज्यासी।

तू राख भरोसो,
नाव तेरी तर ज्यासी,
बीच भंवर न अटके नैया,
मैया पार लगासी रे।



ओरण परिक्रमा भजन | तु राख भरोसो | Karni Mata Bhajan | Gulab Nath Ji Bhajan 

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ओरण परिक्रमा भजन | तु राख भरोसो | Karni Mata Bhajan | Gulab Nath Ji Bhajan Lyrics by Vinaya Tamoli 
 
आस्था की वह गहराई है जहाँ भक्त अपने सारे भय, संशय और अशक्ति को माँ की शरण में छोड़ देता है। हर पंक्ति में विश्वास की गूँज है कि जीवन के सागर में चाहे कितनी भी लहरें उठें, जब नाव माँ के संरक्षण में है तो डूबने का भय नहीं।

“तू राख भरोसो, नाव तेरी तर ज्यासी”—यह पंक्ति पूरे गीत का हृदय है। यहाँ जीवन को नाव और माँ के आशीर्वाद को दिशा माना गया है। यह प्रतीकत्व भक्त की उस मानसिक स्थिति को दर्शाता है जो संघर्षों से घिरी है किंतु फिर भी दृढ़ विश्वास रखती है कि माता स्वयं तारणहार हैं। “सांचे मन से कर ले ध्यानना, मन का मैल मिटा ले प्राणी”—इसमें आत्मशुद्धि और आंतरिक भक्ति का सन्देश है। मातृ‑स्मरण केवल रक्षक ही नहीं, आत्मा को निर्मल करने वाला भी है। माँ के ध्यान में लीन होकर मनुष्य अपने भीतर की मलिनता और व्यथा से मुक्त हो जाता है; यही जीवन को सुफल बना देता है। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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