कचरो छा गयो रे कर्मो पे कैसे काटे दुखड़ो भजन
कचरो छा गयो रे कर्मो पे कैसे काटे दुखड़ो भजन
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा,
काटे दुखड़ा रे कैसे मिटें दुखड़ा,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
नौ दस मास गर्भ के अंदर,
पाया घणा दुखड़ा,
कोल करी ने बायर आयो,
फेर लियो मुखड़ा,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
गयो बचपन ने आई जवानी,
बोले घणा उकड़ा,
छोटे बड़े री कदर न जाणे,
बोले घणा बेड़ा,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
गई जवानी आयो बुढ़ापा,
पकड़ लियो लाठी,
आया गया ने काहे बुलावे,
कोई हाथ पकड़ो,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
यम पार की लेवा दवाईया,
मच्यो घणा झगड़ा,
कहे कबीर सुनो भाई साधु,
सत्य नाम रटणो,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा,
काटे दुखड़ा रे कैसे मिटें दुखड़ा,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
कैसे काटें दुखड़ा,
काटे दुखड़ा रे कैसे मिटें दुखड़ा,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
नौ दस मास गर्भ के अंदर,
पाया घणा दुखड़ा,
कोल करी ने बायर आयो,
फेर लियो मुखड़ा,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
गयो बचपन ने आई जवानी,
बोले घणा उकड़ा,
छोटे बड़े री कदर न जाणे,
बोले घणा बेड़ा,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
गई जवानी आयो बुढ़ापा,
पकड़ लियो लाठी,
आया गया ने काहे बुलावे,
कोई हाथ पकड़ो,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
यम पार की लेवा दवाईया,
मच्यो घणा झगड़ा,
कहे कबीर सुनो भाई साधु,
सत्य नाम रटणो,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा,
काटे दुखड़ा रे कैसे मिटें दुखड़ा,
कचरा छा गया रे कर्मों पे,
कैसे काटें दुखड़ा।
||बेहतरीन भजन||कचरो छईग्यो रे कर्मा रो कैसे काटे दुखड़ो||स्वर-प्रकाश पग्गी||संपर्क-7748870002
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।
कबीर की कमाई कभी निष्फल न जाती, सात समुद्र अड़ा फिरे आगे मिले। आग लगी वृक्ष माया में सब पात जलते, पंछी जलने से उड़ क्यों न जाते जब पंख पास। फल फूल खाकर पात भरे रहते, उड़ना धर्म नहीं जलना वृक्ष साथ। पत्ता टूटा डाल से पवन उड़ावे, बिछड़े दूर पड़े न मिले। कचरा छा गया कर्मों पे, कैसे काटें दुखड़े। कबीर दास जी का महात्म्य है कि सत्य नाम रटने की सीख देते, कचरे कर्मों से दुखड़े काटने का मार्ग दिखाते। गर्भ से बुढापा तक दुख सहने वालों को साधु भाई सुणाते। माया वृक्ष की आग में जलने से बचाने को सच्ची कमाई का संदेश देते। यम पार दवाई बनकर जीवन मुक्त करते।
❖Song : - मोहे देखत आवे हांसी
❖Singer : प्रकाश पग्गी सर
❖Album : sadguru kabir bhajan part-3
❖recording : live program records.
❖Editing: Ratanlal bhagat
❖Singer : प्रकाश पग्गी सर
❖Album : sadguru kabir bhajan part-3
❖recording : live program records.
❖Editing: Ratanlal bhagat
|
Author - Saroj Jangir
इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर हरियाणवी भजन भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें। |
