घनश्याम कहे या राम कहे भजन
घनश्याम कहे या राम कहे भजन
घनश्याम कहे या राम कहे,
तुम रूप अनूप दिखाते हो,
कब धनुष बाण धर आते हो,
कब मुरली मधुर बजाते हो।
है वास तुम्हारा घट घट में,
सब जग को नाच नचाते हो,
फिर भी यशोदा के हाथों से,
तुम उखल से बंध जाते हो,
घनश्याम कहें या राम कहें,
तुम रूप अनूप दिखाते हो।
जग के स्वामी तुम हो मालिक,
हम दीन तुम्हारे सेवक हैं,
तुम ही केवट घर जाकर के,
खुद अपने चरण धुलाते हो,
घनश्याम कहें या राम कहें,
तुम रूप अनूप दिखाते हो।
घनश्याम कहे या राम कहे,
तुम रूप अनूप दिखाते हो,
कब धनुष बाण धर आते हो,
कब मुरली मधुर बजाते हो।
तुम रूप अनूप दिखाते हो,
कब धनुष बाण धर आते हो,
कब मुरली मधुर बजाते हो।
है वास तुम्हारा घट घट में,
सब जग को नाच नचाते हो,
फिर भी यशोदा के हाथों से,
तुम उखल से बंध जाते हो,
घनश्याम कहें या राम कहें,
तुम रूप अनूप दिखाते हो।
जग के स्वामी तुम हो मालिक,
हम दीन तुम्हारे सेवक हैं,
तुम ही केवट घर जाकर के,
खुद अपने चरण धुलाते हो,
घनश्याम कहें या राम कहें,
तुम रूप अनूप दिखाते हो।
घनश्याम कहे या राम कहे,
तुम रूप अनूप दिखाते हो,
कब धनुष बाण धर आते हो,
कब मुरली मधुर बजाते हो।
घनश्याम कहे या राम कहे तुम रूप अनेक भावपूर्ण भजन krishan bhajan bhajan bhakti rambhajan krishan
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घनश्याम कहे या राम कहे, तुम रूप अनेक
कण-कण में बसे हो प्रभु, तुम ही हो एक
कभी वनवासी राम बने, कभी बंसीधर श्याम
हर युग में तुम आए प्रभु, लेकर प्रेम का नाम
कण-कण में बसे हो प्रभु, तुम ही हो एक
कभी वनवासी राम बने, कभी बंसीधर श्याम
हर युग में तुम आए प्रभु, लेकर प्रेम का नाम
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Author - Saroj Jangir
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