मेरा तू ही तो हमदर्द है भजन

मेरा तू ही तो हमदर्द है भजन

दुनिया के आगे प्रभु,
चुपचाप मैं रहता हूँ,
मेरा तू ही तो हमदर्द है,
जिसे हर दर्द कहता हूँ,
दुनिया के आगे प्रभु।।

दुनिया की आदत,
करती बगावत,
जब दिन बुरे घिरते,
जब दिन बुरे घिरते,
नज़र चुराते, दूरी बढ़ाते,
सब यार मुँह फेरते,
सब यार मुँह फेरते,
ना समझे कोई भी,
किसी की परेशानियाँ,
मेरा तू ही तो हमदर्द है,
जिसे हर दर्द कहता हूँ,
दुनिया के आगे प्रभु।।

जग है छलावा,
तेरे अलावा,
किसी पे भरोसा नहीं,
किसी पे भरोसा नहीं,
मुझे दाना-पानी,
सिवा तेरे दानी,
किसी ने परोसा नहीं,
किसी ने परोसा नहीं,
भला कैसे भूलूँ,
मैं तेरी मेहरबानियाँ,
मेरा तू ही तो हमदर्द है,
जिसे हर दर्द कहता हूँ,
दुनिया के आगे प्रभु।।

आया नज़र ना,
कोई भी अपना,
जब मुझको दरकार थी,
जब मुझको दरकार थी,
तब मेरे पथ का,
जीवन के रथ का,
तू ही बना सारथी,
तू ही बना सारथी,
माधव ने की,
हर क़दम पर निगेहबानियाँ,
मेरा तू ही तो हमदर्द है,
जिसे हर दर्द कहता हूँ,
दुनिया के आगे प्रभु।।

दुनिया के आगे प्रभु,
चुपचाप मैं रहता हूँ,
मेरा तू ही तो हमदर्द है,
जिसे हर दर्द कहता हूँ,
दुनिया के आगे प्रभु।।


मेरा तू ही तो हमदर्द है | Uma Lahari Bhajan | भावपूर्ण भजन | khatu shyam bhajan

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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