शिव रे स्वरुपी शान्तिनाथजी म्हारा दाता
शिव रे स्वरुपी शान्तिनाथजी म्हारा दाता
शिव स्वरूपी शान्तिनाथजी, म्हारा दाता,
भेरु अखाड़े ज्योतिर्मय धाम रे,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
जालौरी रा पीर अमर धाम,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
जालौरी भाकर में ऊँचे,
डूंगरें म्हारा दाता,
जालौरी पर्वत ऊँचे,
डूंगरें म्हारा दाता,
भवड़ गुफा में जपिया जाप,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
शिव भोला ने रटीया आप,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
सिरें मंदिर स्वर्ग समानो,
सोने रो म्हारा दाता,
नव नाथों रो प्रकाश,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
केशरनाथजी रो प्रताप,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
सिरें मंदिर समाधि,
आपरी म्हारा दाता,
आवे-आवे युग संसार,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
गांव नरसोंणा सूं,
आया आप ही म्हारा दाता,
उत्तमसिंह राठौड़ आपरी द्वार,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
कर दीजो भव सुई पार,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
गंगा ज्यूं निर्मल गंगा,
नाथजी ओ दाता,
करे थारे चरणों री सेवा,
ओ म्हारा दाता,
कर दीजो भव सुई पार,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
पुरोहित चेतन ने चरणा,
राखजो म्हारा दाता,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
शिव स्वरूपी शान्तिनाथजी, म्हारा दाता,
भेरु अखाड़े ज्योतिर्मय धाम रे,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
जालौरी रा पीर अमर धाम,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
भेरु अखाड़े ज्योतिर्मय धाम रे,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
जालौरी रा पीर अमर धाम,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
जालौरी भाकर में ऊँचे,
डूंगरें म्हारा दाता,
जालौरी पर्वत ऊँचे,
डूंगरें म्हारा दाता,
भवड़ गुफा में जपिया जाप,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
शिव भोला ने रटीया आप,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
सिरें मंदिर स्वर्ग समानो,
सोने रो म्हारा दाता,
नव नाथों रो प्रकाश,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
केशरनाथजी रो प्रताप,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
सिरें मंदिर समाधि,
आपरी म्हारा दाता,
आवे-आवे युग संसार,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
गांव नरसोंणा सूं,
आया आप ही म्हारा दाता,
उत्तमसिंह राठौड़ आपरी द्वार,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
कर दीजो भव सुई पार,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
गंगा ज्यूं निर्मल गंगा,
नाथजी ओ दाता,
करे थारे चरणों री सेवा,
ओ म्हारा दाता,
कर दीजो भव सुई पार,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
पुरोहित चेतन ने चरणा,
राखजो म्हारा दाता,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
शिव स्वरूपी शान्तिनाथजी, म्हारा दाता,
भेरु अखाड़े ज्योतिर्मय धाम रे,
ओ सतगुरुजी म्हारा,
जालौरी रा पीर अमर धाम,
ओ दीन गुरुजी म्हारा,
आवो नी, पधारो म्हारे बेल ।
शिव स्वरूपी शान्तिनाथ जी ||जोग भारती,गीता गोस्वामी की जुगलबंदी में ऐसा भजन कभी नही सुना होगा ||
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Author - Saroj Jangir
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