गणराज के चरणों में मेरा बार बार वंदन
गणराज के चरणों में मेरा बार बार वंदन
(मुखड़ा)
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन,
पहले तुम्हें मनाएं,
पहले तुम्हें मनाएं,
शिव गौरा जी के नंदन,
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन।
(अंतरा)
हो लाडले उमा के,
शिव जी के हो दुलारे,
हर काज में हो पहले,
हर काज में हो पहले,
गणराज तेरा पूजन,
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन।
हर काल में हो व्यापक,
हर सुर में तुम बसे हो,
करता जगत ये सारा,
पहले तुम्हारा पूजन,
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन।
(पुनरावृति)
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन,
पहले तुम्हें मनाएं,
पहले तुम्हें मनाएं,
शिव गौरा जी के नंदन,
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन।
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन,
पहले तुम्हें मनाएं,
पहले तुम्हें मनाएं,
शिव गौरा जी के नंदन,
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन।
(अंतरा)
हो लाडले उमा के,
शिव जी के हो दुलारे,
हर काज में हो पहले,
हर काज में हो पहले,
गणराज तेरा पूजन,
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन।
हर काल में हो व्यापक,
हर सुर में तुम बसे हो,
करता जगत ये सारा,
पहले तुम्हारा पूजन,
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन।
(पुनरावृति)
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन,
पहले तुम्हें मनाएं,
पहले तुम्हें मनाएं,
शिव गौरा जी के नंदन,
गणराज के चरणों में,
मेरा बार बार वंदन।
गणेश चतुर्थी स्पेशल ।। पवन लोधा ।। गणराज के चरणों में मेरा बार बार वंदन ।। Pawan Lodha Ganesh bhajan
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गणराज, शिव और गौरा के नंदन, वह प्रथम पूज्य देवता हैं, जिनके चरणों में बार-बार वंदन करने से भक्त का मन पवित्र और शांत हो जाता है। उनकी महिमा हर काल और हर कार्य में सर्वोपरि है, क्योंकि वे हर शुभ कार्य की शुरुआत में पूजे जाते हैं। उमा और शिव के लाडले के रूप में गणपति हर भक्त के हृदय में बसे हैं, और उनकी कृपा से हर कार्य सिद्ध होता है। भक्तों का यह समर्पण और श्रद्धा ही उन्हें गणराज के और करीब लाती है, जहां उनकी पूजा से जीवन की हर बाधा दूर होती है और मन को असीम शांति प्राप्त होती है।
सारा जगत गणपति की महिमा को मानता है, क्योंकि उनकी उपस्थिति हर सुर और हर क्षण में व्याप्त है। वे वह शक्ति हैं, जो भक्तों को बल, बुद्धि, और समृद्धि प्रदान करते हैं। गणराज के चरणों में नतमस्तक होने वाला भक्त अपनी हर मनोकामना को पूर्ण होते देखता है, क्योंकि उनकी कृपा हर काज को सफल बनाती है। यह भक्ति का वह पवित्र भाव है, जो भक्त को गणपति के प्रेम में डुबो देता है, और उनके आशीर्वाद से जीवन का हर पल सार्थक और मंगलमय हो जाता है।
सारा जगत गणपति की महिमा को मानता है, क्योंकि उनकी उपस्थिति हर सुर और हर क्षण में व्याप्त है। वे वह शक्ति हैं, जो भक्तों को बल, बुद्धि, और समृद्धि प्रदान करते हैं। गणराज के चरणों में नतमस्तक होने वाला भक्त अपनी हर मनोकामना को पूर्ण होते देखता है, क्योंकि उनकी कृपा हर काज को सफल बनाती है। यह भक्ति का वह पवित्र भाव है, जो भक्त को गणपति के प्रेम में डुबो देता है, और उनके आशीर्वाद से जीवन का हर पल सार्थक और मंगलमय हो जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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