ऐसी मोहन ने मुरली बजाई
ऐसी मोहन ने मुरली बजाई कृष्णा भजन
ऐसी मोहन ने मुरली बजाई,
सारी गोपी है सुनने को आई।
ऐसी मधुर बजाई,
तूने मुरली की तान,
मैं तो जाती झूम,
जब सुनते है कान,
मैं खुद को रोक ना पाई सारी,
गोपी है सुनने को आई,
ऐसी मोहन ने मुरली बजाई,
सारी गोपी है सुनने को आई।
तेरी मुरली में जाने क्या जादू भरा,
मेरे मन में न रहता काबू मेरा,
ऐसा जादू तुने दिखलाई,
सारी गोपी सुनने को आई,
ऐसी मोहन ने मुरली बजाई,
सारी गोपी है सुनने को आई।
मोहन मुझको भी मुरली बना लीजिये,
अपने होठों पे मुझको सजा लीजिये,
सपने में भी देती सुनाई सारी,
गोपी है सुनने को आई,
ऐसी मोहन ने मुरली बजाई,
सारी गोपी है सुनने को आई।
सारी गोपी है सुनने को आई।
ऐसी मधुर बजाई,
तूने मुरली की तान,
मैं तो जाती झूम,
जब सुनते है कान,
मैं खुद को रोक ना पाई सारी,
गोपी है सुनने को आई,
ऐसी मोहन ने मुरली बजाई,
सारी गोपी है सुनने को आई।
तेरी मुरली में जाने क्या जादू भरा,
मेरे मन में न रहता काबू मेरा,
ऐसा जादू तुने दिखलाई,
सारी गोपी सुनने को आई,
ऐसी मोहन ने मुरली बजाई,
सारी गोपी है सुनने को आई।
मोहन मुझको भी मुरली बना लीजिये,
अपने होठों पे मुझको सजा लीजिये,
सपने में भी देती सुनाई सारी,
गोपी है सुनने को आई,
ऐसी मोहन ने मुरली बजाई,
सारी गोपी है सुनने को आई।
श्री कृष्ण का बहुत ही सुपरहिट भजन | Krishna bhajan 2023 | Radha Krishna bhajan | Anandpur bhajan
जब मोहन की मुरली गूँजती है, तो वह केवल वंशी की तान नहीं होती – वह अनाहत नाद की पुकार होती है जो हर हृदय तक पहुँच जाती है। गोपियाँ जब सुनने दौड़ पड़ती हैं, तो वे केवल संगीत की ओर नहीं, अपने ईश्वर की ओर आकर्षित होती हैं। उस तान में ऐसा जादू है जो मन को वश में कर लेता है, देह की सीमा लाँघकर आत्मा को छू जाता है। जो भी सुनता है, उसका निजत्व मिट जाता है, बस एक भाव रह जाता है – “मैं उसकी हूँ, वही बना दे।” मुरली की मधुरता उस दिव्य सृष्टि की भाषा है, जिसमें ईश्वर बोलता नहीं, बजता है।
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