अंग संग ने गुरुजी सदा सुण लैंदे भजन
अंग संग ने गुरुजी सदा सुण लैंदे ने भजन
अंग संग ने गुरुजी सदा,
सुण लैंदे ने दिल दी दुआ,
मंगणाँ वी नइँ आउँदा मैंनूँ,
फिर वी तू मेहराँ वरसाइयाँ,
मैं कोझी-कमली दे पल्लै,
मूहों मंगियाँ ख़ैराँ पाइयाँ,
नित शुकर कराँ मैं तेरा,
उपकार तू कीता बड़ा।
सजदे दा तरीक़ा आउँदा नइँ,
आउँदी मैंनूँ अरदास नइँ,
मैं विच नइँ कोई वी ख़ूबी,
कोई हुनर कोई गुण ख़ास नइँ,
सब नज़रे-इनायत वे तेरी,
रहमत दियाँ तू झड़ियाँ लाइयाँ,
की की मैं बख़ान कराँ,
दित्तियाँ रज-रज ख़ुशियाँ।
हथ जोड़ के सीस झुका लैंदी,
सुख-दुख सब खोल सुणा लैंदी,
सूरत तेरी सतगुरु प्यारे,
अखियाँ दे विच वसा लैंदी,
बस इतनी तमन्ना सी मेरी,
तू बख़्शियाँ जग दियाँ वड्डेयाइयाँ,
अहसास गुरुजी तेरा,
पग-पग ते सहाई मेरा।
मैं सुणया सी इन्साफ़ सदा,
करमाँ दे मुताबिक़ होन्दा ए,
हर बन्दा अपणे करमाँ दी,
चंगियाँ-मंदियाँ नूँ ढोन्दा ए,
मैं विच तू की तकया दाता,
सब ग़लतियाँ-शलतियाँ बख़्शाइयाँ,
दोषाँ नूँ भुलाया तुसाँ,
चंगेयाँ विच रलाया तुसाँ।
कीवें मैं शुकर कराँ तेरा,
किस तरहाँ मैं धन्यवाद कराँ,
हक़ तों ज़्यादा दित्ता सानूँ,
सिर झुक जाउँदा जद याद कराँ,
मर-मुक-जाणे साहिल दियाँ,
वी हरदम तू कीतियाँ सुणवाइयाँ,
वड्डेयाई तेरी सतगुरू,
बाँ फड़ लई मेरी सतगुरू।
सुण लैंदे ने दिल दी दुआ,
मंगणाँ वी नइँ आउँदा मैंनूँ,
फिर वी तू मेहराँ वरसाइयाँ,
मैं कोझी-कमली दे पल्लै,
मूहों मंगियाँ ख़ैराँ पाइयाँ,
नित शुकर कराँ मैं तेरा,
उपकार तू कीता बड़ा।
सजदे दा तरीक़ा आउँदा नइँ,
आउँदी मैंनूँ अरदास नइँ,
मैं विच नइँ कोई वी ख़ूबी,
कोई हुनर कोई गुण ख़ास नइँ,
सब नज़रे-इनायत वे तेरी,
रहमत दियाँ तू झड़ियाँ लाइयाँ,
की की मैं बख़ान कराँ,
दित्तियाँ रज-रज ख़ुशियाँ।
हथ जोड़ के सीस झुका लैंदी,
सुख-दुख सब खोल सुणा लैंदी,
सूरत तेरी सतगुरु प्यारे,
अखियाँ दे विच वसा लैंदी,
बस इतनी तमन्ना सी मेरी,
तू बख़्शियाँ जग दियाँ वड्डेयाइयाँ,
अहसास गुरुजी तेरा,
पग-पग ते सहाई मेरा।
मैं सुणया सी इन्साफ़ सदा,
करमाँ दे मुताबिक़ होन्दा ए,
हर बन्दा अपणे करमाँ दी,
चंगियाँ-मंदियाँ नूँ ढोन्दा ए,
मैं विच तू की तकया दाता,
सब ग़लतियाँ-शलतियाँ बख़्शाइयाँ,
दोषाँ नूँ भुलाया तुसाँ,
चंगेयाँ विच रलाया तुसाँ।
कीवें मैं शुकर कराँ तेरा,
किस तरहाँ मैं धन्यवाद कराँ,
हक़ तों ज़्यादा दित्ता सानूँ,
सिर झुक जाउँदा जद याद कराँ,
मर-मुक-जाणे साहिल दियाँ,
वी हरदम तू कीतियाँ सुणवाइयाँ,
वड्डेयाई तेरी सतगुरू,
बाँ फड़ लई मेरी सतगुरू।
Mangna Vi Nahi Aaunda (with Lyrics) by NIDHI SAHIL || Guruji Bhajan
Singer : Nidhi Sahil
Lyrics © Pradeep Sahil
Music : Satish Kumar
यह आत्म-स्वीकार का भी भाव है — स्वयं को दोषों से भरा मानना, और फिर भी सतगुरु की दया में अपना उद्धार देखना। यह दया किसी योग्य कर्म का फल नहीं, बल्कि प्रेम की झड़ी है जो बिना भेदभाव के बरसती है। सच्चा गुरु भक्त की कमज़ोरियों में दोष नहीं, संभावना देखता है; वह भूलों को मिटाकर उन्हें अपनी कृपा के प्रकाश में मिला लेता है। यही कारण है कि उसकी उपस्थिति जीवन को दिशा देती है, और उसका नाम मन की शांति का आधार बन जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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