चेतन ही मम जाण्यो चेतन श्याम भजन

चेतन ही मम जाण्यो चेतन श्याम भजन

चेतन ही मम जाण्यो चेतन,
श्याम अथायो है,
अब निज आनंद आयो है।।

रजू में सर्प भयो रजनी में,
मिथ्या डर पायो है,
रजू तो रजू देख्यो रवि करके,
भ्रम नसाया है,
अब निज आनंद आयो है।।

कर को कंगण पुछत ढोल्यो,
भूल भूलायो है,
मे ही तन पट दूर कियो,
फिर कंगण पायो है,
अब निज आनंद आयो है।।

सुपने सुती नार सुहागण,
बालक गमायो है,
भाग्यो सुपनो जागी सुध चेतन,
शिशु दरसायो है,
अब निज आनंद आयो है।।

अपनो आप चित घन चेतन,
नित निर्दायो है श्याम मलूक,
मलूक निजानंद,
विमल अजायो है,
अब निज आनंद आयो है।।

चेतन ही मम जाण्यो चेतन,
श्याम अथायो है,
अब निज आनंद आयो है।।



चेतन ही मम जाण्यो चेतन | Chetan Hi Mam Janyo Chetan | Chetawani Bhajan| Sahiram Bhat Surtgarh ||

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Chetan Hi Mam Janyo Chetana Sahiram Bhat Suratgarh
Chetan Hi Mam Janyo Chetana Sahiram Bhat

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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