अज मेरी मैया ने जगराते दे विच आऊना
अज मेरी मैया ने जगराते दे विच आऊना
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा
अज शेरांवाली ने
जगराते दे विच आऊणा।
राहां दे विच फूल बरसा दिओ
सोहणा मां दा भवन सजा दिओ
चार चफेरे लाइटां ला के
रात नूं दिन चड़ाऊणा
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा।
हलवा पूरी छोले बना दिओ
मैया नूं वी भोग ला दिओ
भोग लगवा के मैया नूं
फिर संगत विच वरताऊणा
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा।
हथ जोड़ के खड़ जाओ सारे
मैया दे लईयो मल द्वारे
अज है शेरांवाली ने
सब नूं दरस दिखाऊणा
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा।
सारे ही अज झोलियां भर लियो
पूरियां सब मुरादां कर लियो
जनाल वाले जसपाल नाल रल के
दिलशान ते जसपाल ने रल के
ऊंची जयकारा लाऊणा
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा।
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा
अज शेरांवाली ने
जगराते दे विच आऊणा।
जगराते दे विच आऊणा
अज शेरांवाली ने
जगराते दे विच आऊणा।
राहां दे विच फूल बरसा दिओ
सोहणा मां दा भवन सजा दिओ
चार चफेरे लाइटां ला के
रात नूं दिन चड़ाऊणा
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा।
हलवा पूरी छोले बना दिओ
मैया नूं वी भोग ला दिओ
भोग लगवा के मैया नूं
फिर संगत विच वरताऊणा
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा।
हथ जोड़ के खड़ जाओ सारे
मैया दे लईयो मल द्वारे
अज है शेरांवाली ने
सब नूं दरस दिखाऊणा
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा।
सारे ही अज झोलियां भर लियो
पूरियां सब मुरादां कर लियो
जनाल वाले जसपाल नाल रल के
दिलशान ते जसपाल ने रल के
ऊंची जयकारा लाऊणा
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा।
अज मेरी मैया ने
जगराते दे विच आऊणा
अज शेरांवाली ने
जगराते दे विच आऊणा।
ਅੱਜ ਮੇਰੀ ਮਈਆ ਨੇ ਜਗਰਾਤੇ ਦੇ ਵਿੱਚ ਆਉਣਾ जसपाल जनाल आज मेरी मैया ने जगराते मेआना#highlights2025 #everyone
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जब भक्ति उत्सव बन जाती है और जगराते का माहौल केवल संगीत या सजावट का नहीं रहता — वह माँ के स्वागत का पवित्र संगम बन जाता है। यह विश्वास कि “आज मेरी मैया ने जगराते में आऊणा,” साधारण वाक्य नहीं, एक जीता‑जागता अनुभव है। भक्त का मन पहले से ही उस दिव्यता को महसूस करने लगता है, जैसे देवी पधार चुकी हों। राहों पर फूल बिछाना, भवन सजाना, रोशनी से अंधकार मिटाना — ये सब बाहरी तैयारी वास्तव में भीतर की श्रद्धा का प्रतिबिंब हैं। वह मन जो यह मान लेता है कि माँ स्वयं आएँगी, उसके चारों ओर वातावरण भी उसी ऊर्जा से जगमगाने लगता है। यह भक्ति की वह अवस्था है जहाँ प्रतिमा नहीं, उपस्थिति की अनुभूति की जाती है।
जगराते का दृश्य केवल आयोजन नहीं, बल्कि मिलन का क्षण है। जब हलवा‑पूरी‑छोले का भोग लगाया जाता है, तो उसमें माँ के प्रति अपनी मेहनत, अपना प्रेम अर्पित होता है। हर भक्त उस पवित्र पल की प्रतीक्षा करता है जब माँ के दरस मिलें, और भक्ति का ताप हर थके मन को सुख में बदल दे। यह श्रद्धा उस संगत की भी है जहाँ सभी मिलकर जयकारा लगाते हैं — न कोई बड़ा, न छोटा, सब माँ के बच्चे हैं। जब ऐसा भाव जन्म लेता है तो रात सच में उजाला बन जाती है। यही वह पल है जब भक्ति और उत्सव एक हो जाते हैं, और हर दिल से बस यही स्वर उठता है — “अज मेरी मैया ने जगराते दे विच आऊणा।”
ਇੱਕ ਛੋਟਾ ਬੱਚਾ ਮਈਆ ਦੇ ਨਵਰਾਤਰਿਆ ਵਿੱਚ ਕਰਵਾਏ ਆਪਣੇ ਘਰ ਵਿੱਚ ਮਾਤਾ ਰਾਣੀ ਦੇ ਜਾਗਰਣ ਦਾ ਸੁਨੇਹਾ ਤੋਤਲੀ ਅਵਾਜ ਵਿੱਚ ਸਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਦਿੰਦਾ ਹੋਇਆ ਕਹਿੰਦਾ ਅੱਜ ਜਗਰਾਤੇ ਦੇ ਵਿੱਚ ਮਈਆ ਨੇ ਆਉਣਾ ਤੇ ਤੁਸੀ ਸਾਰਿਆ ਨੇ ਵੀ ਜਰੂਰ ਆਉਣਾ ਜੀ ਨਾਲੇ ਮਈਆ ਦਾ ਸਵਾਗਤ ਕਰਨਾ | ਸਵਾਗਤ ਵਿੱਚ ਕੀ ਕੀ ਕਰਨਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਦੱਸ ਰਿਹਾ
2025
SINGER:- JASPAL JANAL
WRITER AND lyrics :- JASPAL JANAL
MUSIC ALL THE BEST
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माँ मंगलाकरनी साथ है फिर डरने की क्या बात
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जगराते का दृश्य केवल आयोजन नहीं, बल्कि मिलन का क्षण है। जब हलवा‑पूरी‑छोले का भोग लगाया जाता है, तो उसमें माँ के प्रति अपनी मेहनत, अपना प्रेम अर्पित होता है। हर भक्त उस पवित्र पल की प्रतीक्षा करता है जब माँ के दरस मिलें, और भक्ति का ताप हर थके मन को सुख में बदल दे। यह श्रद्धा उस संगत की भी है जहाँ सभी मिलकर जयकारा लगाते हैं — न कोई बड़ा, न छोटा, सब माँ के बच्चे हैं। जब ऐसा भाव जन्म लेता है तो रात सच में उजाला बन जाती है। यही वह पल है जब भक्ति और उत्सव एक हो जाते हैं, और हर दिल से बस यही स्वर उठता है — “अज मेरी मैया ने जगराते दे विच आऊणा।”
ਇੱਕ ਛੋਟਾ ਬੱਚਾ ਮਈਆ ਦੇ ਨਵਰਾਤਰਿਆ ਵਿੱਚ ਕਰਵਾਏ ਆਪਣੇ ਘਰ ਵਿੱਚ ਮਾਤਾ ਰਾਣੀ ਦੇ ਜਾਗਰਣ ਦਾ ਸੁਨੇਹਾ ਤੋਤਲੀ ਅਵਾਜ ਵਿੱਚ ਸਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਦਿੰਦਾ ਹੋਇਆ ਕਹਿੰਦਾ ਅੱਜ ਜਗਰਾਤੇ ਦੇ ਵਿੱਚ ਮਈਆ ਨੇ ਆਉਣਾ ਤੇ ਤੁਸੀ ਸਾਰਿਆ ਨੇ ਵੀ ਜਰੂਰ ਆਉਣਾ ਜੀ ਨਾਲੇ ਮਈਆ ਦਾ ਸਵਾਗਤ ਕਰਨਾ | ਸਵਾਗਤ ਵਿੱਚ ਕੀ ਕੀ ਕਰਨਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਦੱਸ ਰਿਹਾ
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Author - Saroj Jangir
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