माँ नर्मदे तट पर तेरे मैं ध्यान भजन

माँ नर्मदे तट पर तेरे मैं ध्यान नर्मदा माता भजन

माँ नर्मदे तट पर तेरे मैं ध्यान

माँ नर्मदे तट पर तेरे मैं ध्यान जो लगाऊं,
जीवन का सार पाऊं जग को मैं भूल जाऊं,
माँ नर्मदे तट पर तेरे मैं ध्यान जो लगाऊं।

तेरी लहरों की गूंजे चंचलता,
दिल की धड़कन में आ समायेगी,
मेरी हर सांस की वो ताल मधुर,
तेरे गुणगान गाये जायेगी,
बार बार आऊं गुणगान तेरा गाऊं,
चरणों में सर झुकाऊं,
माँ नर्मदे तट पर तेरे,
मैं ध्यान जो लगाऊं।

तेरे आँचल की रज को छूने से,
मिलता दिल को बड़ा सुकून मुझे,
पाप के बोझ से मलिन मन को,
करती पावन सदा पुनीत मुझे,
गोदी में तेरी सदा खेलु माँ मैं नर्मदा,
धारा के संग गाऊं,
माँ नर्मदे तट पर तेरे,
मैं ध्यान जो लगाऊं।

तुमने लाखों को माँ वरदान दिये,
सबकी बिगड़ी को माँ संवारा है,
जो भी तेरी शरण चला आया,
झोली भर के ही फिर वो आया है,
डुबकी लगाएं पावन जल से नहाएं,
मधुर तेरे जस गाये,
माँ नर्मदे तट पर तेरे,
मैं ध्यान जो लगाऊं।

माँ नर्मदा के तट पर | Maa Narmada Ke Tatt Par | Madhur Sharma | Har Har Narmade

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Song: Narmada Ke Tatt Par
Singer: Madhur Sharma (Bhopal)
Lyricist: Lakshminarayan Sharma
Music: Sachin Upadhyay (Jabalpur)
Recording: Sound Plant Studio (Bhopal)
Video Edit: Ajay Sahu
Videography: Diksha Sharma
 
नर्मदा की महिमा केवल एक नदी के प्रवाह में नहीं, बल्कि उस पावन धारा में है जो साधक के हृदय को भी निर्मल बना देती है। जब कोई उसके तट पर ध्यान में लीन होता है, तो संसार का शोर फीका पड़ जाता है और मन में दिव्य शांति का अनुभव होता है। उसकी लहरों की गूंज चेतना में मधुरता जगाती है और धड़कनों को लय प्रदान करती है। यह अनुभव ऐसा होता है मानो स्वयं प्रकृति भक्ति के स्वर में लीन होकर साधक को अन्तर्यात्रा की ओर ले जा रही है। नर्मदा का तट मनुष्य को संसारिक आसक्ति से विलग कर जीवन का वास्तविक सार आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।  

उसकी रज का स्पर्श आत्मा के बोझों को हल्का कर राहत प्रदान करता है। धर्म परंपराओं में नर्मदा को मातृस्वरूप माना गया है, क्योंकि उसके जल में डुबकी केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि अंतर्मन को भी पवित्र कर देती है। यह धारा हर उस जन के लिए कल्याणकारी है जो श्रद्धा से उसकी शरण में आता है। उसके आंचल में जन्मा यह भाव कि वह सभी प्राणियों की आशा और रक्षक है, साधक को भक्ति और विश्वास का अमूल्य वरदान देता है। जो भी उसकी उपासना करता है, वह पाप से मुक्त होकर जीवन में नवीन ऊर्जा और अनुग्रह का अनुभव करता है। इस प्रकार नर्मदा केवल जल की धारा नहीं, बल्कि माँ के समान गोद है, जो अपने बच्चों को पवित्र कर दिव्यता की ओर अग्रसर करती है। 
 
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