मैं श्वेत वीरानी रंग श्यामल नूरानी हो गई भजन

मैं श्वेत वीरानी रंग श्यामल नूरानी हो गई भजन

 
मैं श्वेत वीरानी रंग श्यामल नूरानी हो गई भजन

मैं श्वेत वीरानी रंग,
श्यामल नूरानी हो गई,
तेरे रूह छुअन से मैं कान्हा,
ये बावली दीवानी हो गई।

जग हरजाई सब प्रीत न मानी,
पिया बैरी माने मोरे इसे जग हंसाई,
किसको सुनाऊं पीर विरह जताऊं,
मूँदे जब अंखियन तुझको ही पाऊं,
सब राजपाट छोड़,
तेरे प्रीत में बैरागी हो गयी,
तेरे रूह छुअन से मैं कान्हा,
ये बावली दीवानी हो गयी।

गोपी थी मैं पिछले जनम में गोविंद,
रही जो अधूरी अगन उसको है बुझानी,
रचा है ये कैसा जुलुम रे कान्हा,
पिया को भी देखूं जब तुझको ही पाऊं,
बालमन में मान स्वामी,
तेरे लगन में जोगी हो गयी,
तेरे रूह छुअन से मैं कान्हा,
ये बावली दीवानी हो गयी।

तुझको पहन के अंग अंग साजे,
धड़कन भी देखो मेरा धुन मुरली बाजे,
रस ये लगन का रग रग समा है,
नृत्य से बालम मेरा पांव न थमा है,
मान औषधि मैं कान्हा तुमको,
दरश की रोगी हो गयी,
तेरे रूह छुअन से मैं कान्हा,
ये बावली दीवानी हो गयी।

मैं श्वेत वीरानी रंग,
श्यामल नूरानी हो गई,
तेरे रूह छुअन से मैं कान्हा,
ये बावली दीवानी हो गई।


मीरा दीवानी हो गई || मीरा भजन || रूपेश चौधरी || रिशव शाण्डिल्य

Singer-Rupesh Choudhary
Composer-Rupesh Choudhary
Lyrics-Rishav Shandilya 
Tabla-Vikash Sharma
Benjo-Suraj Sharma
Set Designer-Rishav Shandilya
 
कृष्ण प्रेम का आकर्षण इतना अलौकिक है कि वह साधारण व्यक्तित्व को भी आध्यात्मिक रूप से बदल देता है। जब हृदय कान्हा की छुअन को अनुभव कर लेता है तो शुष्क और वीरान मन भी उनके श्यामल स्वरूप की छटा में रंग जाता है। यह स्पर्श आत्मा को पवित्र भावनाओं की सुगंध से भर देता है, जिससे सांसारिक मोह-माया फीकी लगने लगती है। विरह की पीड़ा में भी माधुर्य का अनुभव होता है, क्योंकि उस तड़प में केवल कृष्ण का सान्निध्य ही शेष रह जाता है। हर सांस, हर धड़कन, हर दृष्टि उसी प्रियतम के नाम में विलीन हो जाती है, और जगत के उपहास या अवहेलना का कोई महत्व नहीं रहता। यही विरह भाव अंततः आत्मा को प्रभु के और निकट ले जाता है और एक साधक का जीवन बैराग और भक्ति का गान बन जाता है।

कृष्ण के प्रति यह गहन प्रेम जीवन को एक अनोखे उत्सव में बदल देता है। यह मिलन केवल बाहरी पूजा में नहीं, बल्कि भीतर आत्मा और परमात्मा के सम्मिलन में है, जहां रस, राग और नृत्य एक साथ उमड़ पड़ते हैं। मुरली की धुन जब भीतर गूंजती है तो देह का हर अंग उसका ताल बन जाता है और हृदय की हर धड़कन कृष्ण के नाम का कीर्तन करने लगती है। यह भावभरी भक्ति व्यक्ति को जगत की सीमाओं से पार ले जा कर दिव्य आनंद की स्थिति में पहुंचा देती है। जहाँ हर क्लेश प्रभु के दर्शन से औषधि पा लेता है, वहीं हर अधूरी प्यास उनके रूप, नाम और रसभाव से तृप्त हो जाती है। इस मिलन में साधक का अस्तित्व राजा या दरिद्र का नहीं, केवल राधा जैसी दीवानी आत्मा का हो जाता है, जो कृष्ण रस में पूर्णतः समर्पित और विलीन हो जाती है। 
 
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.


पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।

Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें

Next Post Previous Post