तेरे बिना मेरा बालाजी इस जग में कोण सहारा
तेरे बिना मेरा बालाजी इस जग में कोण सहारा
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
रोम-रोम में बसा होया स,
नाम तेरा बालाजी,
पागल ज्यों डोले जाऊँ मैं,
सुबह-शाम बालाजी,
अब हाथ थाम मेरा — हेर-हेर,
अब हाथ थाम मेरा बालाजी,
मैं भटकूँ मारा-मारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे भवन में चौबीस घंटे,
राम-नाम गुण गाऊँ,
सुबह-शाम तेरी करूँ आरती,
भक्तां में मिल जाऊँ,
तेरे दर्शन करना — हेर-हेर,
तेरे दर्शन करना चाहूँ सूँ,
मन्नै साल बित गे बारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
गुरु मुरारी समचाणे में,
जिनके चेले हजार बने,
सबके अंदर खेलें बाबा,
बसा दिए नर-नार घणे,
करके आशा — हेर-हेर,
करके आशा आए द्वार घणे,
मैं भी आस लगा रह्या,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
सूरजभान कंजावले आला,
ले आया मेहंदीपुर धाम,
गाम समाल सदा यहीं रहणा,
किसकी खातिर ला रह्या जाम,
‘कप्तान शर्मा’ — हेर-हेर,
‘कप्तान शर्मा’ सौदा सिराणा,
दर पे पैर जमा रह्या,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
रोम-रोम में बसा होया स,
नाम तेरा बालाजी,
पागल ज्यों डोले जाऊँ मैं,
सुबह-शाम बालाजी,
अब हाथ थाम मेरा — हेर-हेर,
अब हाथ थाम मेरा बालाजी,
मैं भटकूँ मारा-मारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे भवन में चौबीस घंटे,
राम-नाम गुण गाऊँ,
सुबह-शाम तेरी करूँ आरती,
भक्तां में मिल जाऊँ,
तेरे दर्शन करना — हेर-हेर,
तेरे दर्शन करना चाहूँ सूँ,
मन्नै साल बित गे बारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
गुरु मुरारी समचाणे में,
जिनके चेले हजार बने,
सबके अंदर खेलें बाबा,
बसा दिए नर-नार घणे,
करके आशा — हेर-हेर,
करके आशा आए द्वार घणे,
मैं भी आस लगा रह्या,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
सूरजभान कंजावले आला,
ले आया मेहंदीपुर धाम,
गाम समाल सदा यहीं रहणा,
किसकी खातिर ला रह्या जाम,
‘कप्तान शर्मा’ — हेर-हेर,
‘कप्तान शर्मा’ सौदा सिराणा,
दर पे पैर जमा रह्या,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
तेरे बिना मेरा बालाजी,
इस जग में कौन सहारा,
मन्नै मत ना गैर न्यारा।।
BALAJI KE BHAJAN----Tere Bina Mera Balaji Es Jag Me Kon Sahara ------(NARENDRA KAUSHIK)
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Admin - Saroj Jangir
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