एक बावरी जब पनघट पे चली भजन

एक बावरी जब पनघट पे चली भजन


एक बावरी जब,
पनघट पे चली,
देखती हर जगह,
ढूँढ़ती हर गली,
ढूँढ़ती हर जगह,
देखती हर गली,
मुरली की धुन सुनी,
मुरली वाला नहीं।

बहकाए चले जा रहा ये जहान,
इनकी बातों में आई मैं भी कहाँ,
अब तो करती हूँ रो-रो के फरियाद मैं,
आए सामने जो है मेरी याद में,
एक तरफ है जहान,
एक तरफ है पिया,
जो पिया न मिले तो कुछ भी नहीं,
एक बावरी जब,
पनघट पे चली।

ये निगाहें तलाशें उन्हीं के निशान,
ढूँढ़ें पनघट के प्रेमी छुपे हो कहाँ,
प्यारी कालिंदी तुमको,
हर एक शाम में,
आओ मोहन जरा तुम,
मेरे सामने,
तुम न आए तो ये दम,
निकल जाएगा,
फिर साँसे मेरी ये,
चली न चली,
एक बावरी जब,
पनघट पे चली।

लहराती हुई घुँघरली लटें,
पीली पीतांबरी में हीरे जड़े,
कर में बांसुरी प्यारी सी,
कसते हुए,
टेढ़ी चितवन अधरों से,
हँसते हुए,
आए प्रीतम लगाया मुझको गले,
ए सखी तू मेरी,
कोई गैर नहीं,
एक बावरी जब,
पनघट पे चली।

एक बावरी जब,
पनघट पे चली,
देखती हर जगह,
ढूँढ़ती हर गली,
ढूँढ़ती हर जगह,
देखती हर गली,
मुरली की धुन सुनी,
मुरली वाला नहीं।



BANWARI | Official Bhajan - Kishoridas Chetan | YuvYash | Invincible Audio

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राधे कृष्ण के प्रेम मे डूबी मीरा बाई सा के आशीर्वाद से
प्रातः स्मार्णीय श्री प्रेमानंद जी गुरुदेव की कृपा
प्रेरणा स्त्रोत श्री इंद्रेश जी उपाध्याय
(A Pure Love Story Of Krishna Deewani Banwari)
KISHORIDAS CHETAN PRESENTS
Bhajan : BANWARI
Producer/Singer : KISHORIDAS CHETAN
Music : YuvYash
Mixing : AKSHAT VAISHNAV 
Video : DEEPAK SATOTE
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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