मना भाई खुद सुधर जा पेली भजन

मना भाई खुद सुधर जा पेली भजन

मना भाई खुद सुधर जा पहले,
ओरों ने उपदेश सुनावे,
यूँ नहीं मुक्ति हेली।

ज्ञानी बन महा शान बतावे,
राम सुमिर लो डेली,
खुद माला तृष्णा की फेरे,
या कई बात जमे ली।
मना भाई खुद सुधर जा पहले,
ओरों ने उपदेश सुनावे,
यूँ नहीं मुक्ति हेली।

खुद बैठो कर्मा का कीचड़ में,
करता छेली उछेली,
दूजा ने राय साबुन की देवे,
खुद की चादर मैली।
मना भाई खुद सुधर जा पहले,
ओरों ने उपदेश सुनावे,
यूँ नहीं मुक्ति हेली।

दौड़-दौड़ धन माल कमावे,
ऊँची चुना दी हेली,
दूजा ने केवे धन-दौलत,
माया अंटी रेवेली।
मना भाई खुद सुधर जा पहले,
ओरों ने उपदेश सुनावे,
यूँ नहीं मुक्ति हेली।

बण सौदागर बिणज करे,
मुंडे चेला-चेली,
काण कसर थारी नहीं निकली,
वांकी कई निकलेली।
मना भाई खुद सुधर जा पहले,
ओरों ने उपदेश सुनावे,
यूँ नहीं मुक्ति हेली।

बुद्धपुरी जी गुरुदेव भीम जी,
शरण गुरां की ले ली,
भेर्या गाड़री पंथ सुधारियो,
संगत छोड़ दी गेली।
मना भाई खुद सुधर जा पहले,
ओरों ने उपदेश सुनावे,
यूँ नहीं मुक्ति हेली।

मना भाई खुद सुधर जा पहले,
ओरों ने उपदेश सुनावे,
यूँ नहीं मुक्ति हेली।



ऐसे भजन बहुत कम सुनने को मिलते है// मना भाई खुद सुधर जा पेली

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मन को समझाओ पहले खुद को संभाल लो, बिना अपने सुधार के किसी को उपदेश देना व्यर्थ है। जैसे कोई कीचड़ में फँसा होकर दूसरों को साबुन की सलाह दे, वैसा न हो जाए। राम नाम का सुमिरन रोज करो, माला तृष्णा की न गिनो। धन-दौलत की दौड़ में माया फँसाती है, ऊँची चूना लगाने से कुछ न मिले। सच्ची मुक्ति तो अपने कर्मों को साफ करने से आती है।
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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