थारे रुणिचा को दाल चूरमा मन में भावे भजन

थारे रुणिचा को दाल चूरमा मन में भावे भजन


थारे रुणिचा को दाल चूरमा,
मन में भावे रे,
बाबा रुणीचे को।

पर्चा वाली बावड़ी को,
पानी चोखो लागे रे,
गंगाजल सा मीठो लागे,
कष्ट मिटावे रे,
बाबा रुणीचे को।

सवामणी बनवाकर बाबा,
तेरे भोग लगावाँ जी,
भक्तां सागे मार सबड़का,
जी भर खावाँ जी,
बाबा रुणीचे को।

बर्फी, पेड़ा और कलाकंद,
सारे फीके पड़गे जी,
दूध, मलाई, रबड़ी अब तो,
याद न आवे ओ,
बाबा रुणीचे को।

रामधणी कुछ ऐसा कर दे,
बारह महीने खावाँ जी,
दाल चूरमा खा खा करके,
भजन सुनावाँ जी,
बाबा रुणीचे को।

जम्मा जागरण जद भी होवे,
चूरमो बनावाँ जी,
रामधणी के भोग लगाकर,
सबने बाँटाँ जी,
बाबा रुणीचे को।

भंडारा की प्रसादी में,
दाल चूरमो सोहे रे,
दास गोपाला चूरमो तो,
मन में भावे रे,
बाबा रुणीचे को।

थारे रुणिचा को दाल चूरमा,
मन में भावे रे,
बाबा रुणीचे को।



थारे रुणिचा को दाल चूरमा चोखो लागे! Thare Runicha ko Dal Churma ¡ Ramdev jibhajan¡ gsr music गोपाल

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ओ थारो रुणिचा को दाल चूरमा ,मन म भाव रे, बाबा रुणिचे रा।*
मन भाव रे बाबा मन म भाव रे,बाबा रामदेव
2 पर्चा वाली बावड़ी को पानी चोखो लागे रे
गंगाजल सु मिठो लागे, कस्ट मिटावे रे बाबा रुणिचा को
3सवामणी बनवाकर बाबा ,तेरे भोग लगाव जी,
भगता सागे मार सबड़का,जी भर खावो जी।बाबा रुणिचा को
4बर्फी पैडा ,ओर कलाकन्द,सारे फीके पड़गे जी,दूध मलाई रबड़ी*अब तो, याद ना आवे ओ,बाबा रुणिचा को
5रामधनी कुछ ऐसा करदे ,बारह महीने खावा जी,दाल चूरमा खा *खा करके,भजन सुनावा जी
बाबा रुणिचा को
6जम्मा जागण जद भी होवें चूरमो बनाओ जी
रामधणी के भोग लगाकर, सबने बांटो जी, बाबा रूणिचा को
7भंडारा की प्रसादी मे दाल चूरमो सोहे रे
दास गोपाला चूरमों तो मन में भाव र,बाबा रुणिचा रो
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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