द्वादशज्योतिर्लिङ्गानि द्वादश ज्योतिर्लिंग नामानि
द्वादशज्योतिर्लिङ्गानि द्वादश ज्योतिर्लिंग नामानि
द्वादशज्योतिर्लिङ्गानि द्वादश ज्योतिर्लिंग नामानि
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् ।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम् ॥ १ ॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम् ।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥ २ ॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे ।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये ॥ ३ ॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः ।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥ ४ ॥
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् ।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम् ॥ १ ॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम् ।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥ २ ॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे ।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये ॥ ३ ॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः ।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥ ४ ॥
श्री द्वादशज्योतिर्लिङ्गानि || Shree Dwadash Jyotirling With Lyrics || Pt. Saurabh Krishna Shastri
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Video :Shree Dwadash Jyotirling With Lyrics
Voice : Pt. Saurabh Krishna Shastri
Lyics : Traditional
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श्रीपशुपतिनाथ, जिन्हें हम महादेव, शिव के रूप में पूजा करते हैं, सभी संसार के जीवों के पालनहार और उनके उद्धारक माने जाते हैं। उन्हें एक साथ अनेक रूपों में पूजा जाता है, जैसे भगवान शिव, महाकाल, और भोलेनाथ। वे सभी भूत-प्रेत, असुर और पापियों से मुक्त करने वाले हैं। उनके द्वारा प्रदान की गई शक्ति और शरण से व्यक्ति अपने जीवन की सभी कठिनाइयों को पार कर सकता है। उनके रौद्र रूप और शांत रूप दोनों ही भक्तों के जीवन में अलग-अलग महत्व रखते हैं, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य सभी जीवों के कल्याण का है। उनका ध्यान करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
बारह ज्योतिर्लिंगों की ये पवित्र जगहें पूरे भारत में फैली हुई हैं, जैसे शिव जी ने खुद अपनी अनंत ज्योति से धरती पर अलग-अलग रूपों में प्रकट होकर हमें आशीर्वाद दिया हो। सौराष्ट्र में सोमनाथ जी से लेकर श्रीशैल पर मल्लिकार्जुन जी, उज्जयिनी में महाकाल जी और ओमकारेश्वर में अमलेश्वर जी तक—हर जगह वो अनंत प्रकाश है जो मन की अंधेरी को दूर करता है। फिर परल्या में वैद्यनाथ जी, डाकिनी में भीमशंकर जी, सेतुबंध में रामेश्वर जी, दारुकावन में नागेश जी—ये सब जगहें बताती हैं कि शिव जी हर कोने में मौजूद हैं, हर दुख में साथ देते हैं। वाराणसी में विश्वेश जी, गोदावरी तट पर त्र्यंबकेश जी, हिमालय में केदारनाथ जी और शिवालय में घृष्णेश जी—इनके नाम लेते ही दिल में एक शांति छा जाती है, जैसे सारी थकान मिट गई हो।
ये बारह जगहें सिर्फ मंदिर नहीं, वो दिव्य प्रकाश के केंद्र हैं जहाँ साधक रोज सायंकाल और प्रातःकाल इन नामों का स्मरण करता है तो पिछले सात जन्मों के सारे बोझ हल्के हो जाते हैं। मन में पापों की छाया मिटती है, जीवन में नई रोशनी आती है, और शिव जी की कृपा हर कदम पर साथ चलती है। बस इन नामों को दिल से पुकारो, क्योंकि ये ज्योतिर्लिंग हमें याद दिलाते हैं कि शिव जी हर जगह हैं, हर हाल में हैं। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री शिव जी की।
ये बारह जगहें सिर्फ मंदिर नहीं, वो दिव्य प्रकाश के केंद्र हैं जहाँ साधक रोज सायंकाल और प्रातःकाल इन नामों का स्मरण करता है तो पिछले सात जन्मों के सारे बोझ हल्के हो जाते हैं। मन में पापों की छाया मिटती है, जीवन में नई रोशनी आती है, और शिव जी की कृपा हर कदम पर साथ चलती है। बस इन नामों को दिल से पुकारो, क्योंकि ये ज्योतिर्लिंग हमें याद दिलाते हैं कि शिव जी हर जगह हैं, हर हाल में हैं। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री शिव जी की।
Video :Shree Dwadash Jyotirling With Lyrics
Voice : Pt. Saurabh Krishna Shastri
Lyics : Traditional
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Author - Saroj Jangir
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