मनमोहनी है छवि ये तुम्हारी भजन
मनमोहनी है छवि ये तुम्हारी भजन
मनमोहिनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
सिर पे मुकुट और कानों में कुंडल,
माथे पे हीरा, आँखें ये चंचल,
अधरों पे लगती मुरली है प्यारी,
मनमोहिनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
पुष्पों की माला से बागा सजा है,
उस पे सुगंधित इत्र लगा है,
महक रहे हो, श्याम बिहारी,
मनमोहिनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
दरबार तेरे जो दर्शन को आए,
भक्त जो देखे, तुझे देखता ही जाए,
'आकाश' गूंजे जयकार तुम्हारी,
मनमोहिनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
मनमोहिनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
सिर पे मुकुट और कानों में कुंडल,
माथे पे हीरा, आँखें ये चंचल,
अधरों पे लगती मुरली है प्यारी,
मनमोहिनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
पुष्पों की माला से बागा सजा है,
उस पे सुगंधित इत्र लगा है,
महक रहे हो, श्याम बिहारी,
मनमोहिनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
दरबार तेरे जो दर्शन को आए,
भक्त जो देखे, तुझे देखता ही जाए,
'आकाश' गूंजे जयकार तुम्हारी,
मनमोहिनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
मनमोहिनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा, नजरें हमारी।।
Shringar Bhajan - Manmohini Chhavi | मनमोहनी है छवि ये तुम्हारी | Shyam Bhajan 2021 | Aakash Sharma
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श्रीकृष्ण का रूप अत्यंत मनमोहक और आकर्षक है, जिसकी छवि से दृष्टि हटाना संभव नहीं होता। सिर पर मुकुट, कानों में कुंडल, माथे पर चमकता हीरा, चंचल आँखें, अधरों पर प्यारी मुरली—इन सबका सौंदर्य मन को गहराई से छू जाता है। पुष्पों की माला और सुगंधित इत्र से सजा उनका स्वरूप, श्याम बिहारी की महकती उपस्थिति का अनुभव कराता है। उनके दरबार में जो भी दर्शन करने आता है, वह उनकी छवि में इतना रम जाता है कि बार-बार देखने की इच्छा जाग उठती है, और हर ओर उनके नाम की जयकार गूंजती है।
श्रीकृष्ण, जिन्हें श्याम बिहारी, मनमोहन और ब्रज के नटवर नागर कहा जाता है, सौंदर्य, माधुर्य और दिव्यता के प्रतीक हैं। उनका हर अंग, हर आभूषण, और प्रत्येक भाव भक्तों के मन में प्रेम और भक्ति की लहरें जगा देता है। वे न केवल अपने रूप से, बल्कि अपनी लीलाओं और करुणा से भी संसार को आकर्षित करते हैं। उनके दरबार में आने वाला हर भक्त स्वयं को धन्य मानता है, क्योंकि श्रीकृष्ण का सान्निध्य आत्मा को शांति, आनंद और परम सुख की अनुभूति कराता है।
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श्रीकृष्ण, जिन्हें श्याम बिहारी, मनमोहन और ब्रज के नटवर नागर कहा जाता है, सौंदर्य, माधुर्य और दिव्यता के प्रतीक हैं। उनका हर अंग, हर आभूषण, और प्रत्येक भाव भक्तों के मन में प्रेम और भक्ति की लहरें जगा देता है। वे न केवल अपने रूप से, बल्कि अपनी लीलाओं और करुणा से भी संसार को आकर्षित करते हैं। उनके दरबार में आने वाला हर भक्त स्वयं को धन्य मानता है, क्योंकि श्रीकृष्ण का सान्निध्य आत्मा को शांति, आनंद और परम सुख की अनुभूति कराता है।
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Author - Saroj Jangir
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