आज हम जानेंगे महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी एक प्रेरणादायक कहानी। बुद्ध के जीवन में ऐसी कई घटनाएँ हैं जो हमें करुणा, अहिंसा, और परोपकार का संदेश देती हैं। इस कहानी का शीर्षक है "करुणा की शक्ति।" आइए, इस प्रेरक कथा के माध्यम से जानें कि कैसे गौतम बुद्ध ने एक मछुआरे को अहिंसा का पाठ पढ़ाया और उसके जीवन को बदला। Machhuare Ko Buddha Ki Seekh

मछुआरे और गौतम बुद्ध की प्रेरणादायक कथा
गौतम बुद्ध एक बार अपने शिष्यों के साथ घूमते हुए एक नदी के किनारे पहुंचे। वहां उन्होंने पाया कि एक मछुआरा नदी में जाल डालकर मछलियों को पकड़ रहा था। जब मछलियां जाल में फंस जातीं, तो मछुआरा उन्हें किनारे रख देता। मछलिया बिना पानी के तड़प कर मर जाती। यह दृश्य देखकर गौतम बुद्ध का हृदय द्रवित हो गया।
बुद्ध उस मछुआरे के पास गए और उससे बड़े ही शांत स्वभाव में पूछा, "भैया, तुम इन निर्दोष मछलियों को क्यों पकड़ रहे हो?" मछुआरे ने उत्तर दिया, "महाराज, मैं इन मछलियों को पकड़कर बाजार में बेचता हूं और इसी से मुझे धन मिलता है, इन्ही से गुजर बसर होता है ।"
बुद्ध ने कहा, "अगर मैं तुम्हें इन मछलियों का मूल्य दे दूं, तो क्या तुम इन्हें छोड़ दोगे?" मछुआरे को यह कुछ अजीब लगा लेकिन उसने इस काम के लिए हामी भर ली । बुद्ध ने तुरंत मछुआरे को मछलियों का दाम दिया, और मछुआरे ने मछलियां बुद्ध को सौंप दीं। बुद्ध ने बिना देर किए उन तड़पती हुई मछलियों को वापस नदी में डाल दिया, जिससे कुछ मछलिया दुबारा से जीवित हो गई।
यह देखकर मछुआरा चकित रह गया। उसने बुद्ध से पूछा, "महाराज, आपने मुझसे मछलियां खरीदीं, फिर उन्हें पानी में क्यों छोड़ दिया?"
बुद्ध ने उसे समझाते हुए कहा, "मैंने ये मछलियां इसलिए खरीदी हैं ताकि इन्हें जीवनदान दे सकूं। किसी की हत्या करना पाप है। जैसे यदि मैं तुम्हारा गला घोंट दूं तो तुम्हें भी असहनीय कष्ट होगा। वैसे ही इन मछलियों को पानी के बिना तड़पाना भी पाप है। उनमें भी जीवन है, वे भी सांस लेती हैं। अगर हमें किसी की पीड़ा का एहसास न हो, तो यह हमारी क्रूरता है।"
बुद्ध के इन शब्दों ने मछुआरे को भीतर तक झकझोर दिया। उसने लज्जित होकर कहा, "महाराज, आपने मेरी आंखें खोल दीं। मैं चित्र भी बनाता हूं और अब मुझे लगता है कि चित्रकला से भी मैं अपनी आजीविका चला सकता हूं। आज से मैं मछलियां पकड़ना छोड़ दूंगा और अपनी कला के माध्यम से आजीविका कमाऊंगा।" मछुआरा वहां से विदा लेकर अपनी कला को समर्पित हो गया, और समय के साथ एक प्रसिद्ध चित्रकार बन गया।
इस कहानी से शिक्षा
गौतम बुद्ध की यह कहानी हमें करुणा और अहिंसा का महत्व सिखाती है। जीवन का असली अर्थ दूसरों के प्रति दया और सम्मान से है। यह कहानी हमें प्रेरित करती है कि हम न केवल अपने लिए बल्कि अन्य जीवों के लिए भी प्रेम और करुणा का भाव रखें। किसी के जीवन को बचाना और दूसरों की मदद करना ही सच्ची मानवता है।
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Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं एक विशेषज्ञ के रूप में रोचक जानकारियों और टिप्स साझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें।
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