प्यार भरी शायरी दिल की गहराइयों से निकले उन जज़्बातों का संगम है, जो प्रेम की मिठास और रोमांस की खुशबू बिखेरते हैं। यह शायरी प्रेमियों के दिलों को जोड़ती है और उनके अहसासों को शब्दों में पिरोती है। इस ब्लॉग में, हम आपके लिए चुनिंदा प्यार भरी शायरी प्रस्तुत कर रहे हैं, जो आपके रिश्ते में नई ताजगी और गहराई लाएगी। चाहे आप अपने साथी को प्रभावित करना चाहें या अपने दिल की बात कहना चाहें, ये शायरी आपके जज़्बातों को बखूबी बयां करेंगी।
अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब
अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं
साहिर लुधियानवी
तेरी आँखों में बसी है मेरी दुनिया सारी,
तेरे बिना अधूरी है मेरी प्रेम कहानी।
तेरे बिना ये दिल हमेशा उदास रहता है,
तेरी यादों में ही मेरा हर पल गुजरता है।
तेरी हँसी से रोशन है मेरे दिल का जहाँ,
तेरे बिना हर खुशी लगती है वीरान।
तेरे साथ बिताए लम्हों की है जो बात,
वो यादें बन गई हैं मेरी जिंदगी की सौगात।
तेरे बिना ये रातें भी हैं सूनी-सूनी,
तेरी यादों से ही होती है मेरी सुबह रोशनी।
तेरे बिना ये दिल है एक खाली मकान,
तेरी मोहब्बत से ही है इसकी पहचान।
तेरे बिना ये जीवन है एक अधूरा सफर,
तेरे साथ से ही मिलता है मुझे मुकम्मल सफर।
तेरे बिना ये दिल है एक बेजान सा साज,
तेरी मोहब्बत से ही बजता है इसका राग।
तेरे बिना ये आँखें हैं एक सूना सा ख्वाब,
तेरी मोहब्बत से ही सजता है इनका हर ख्वाब।
झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं
कैफ़ी आज़मी
आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं
सामान सौ बरस का है पल की ख़बर नहीं
हैरत इलाहाबादी
आँखें न जीने देंगी तिरी बे-वफ़ा मुझे
क्यूँ खिड़कियों से झाँक रही है क़ज़ा मुझे
इमदाद अली बहर
क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो
ख़ूब गुज़रेगी जो मिल बैठेंगे दीवाने दो
मियाँ दाद ख़ां सय्याह
तेरे बिना ये होंठ हैं एक खामोश सी जुबां,
तेरी मोहब्बत से ही गूंजती है इनकी हर दास्तां।
तेरे बिना ये दिल है एक वीरान सा शहर,
तेरी मोहब्बत से ही बसता है इसका हर पहर।
तेरे बिना ये जीवन है एक अधूरा गीत,
तेरी मोहब्बत से ही मिलता है इसे संगीत।
तेरे बिना ये दिल है एक बुझा हुआ दीप,
तेरी मोहब्बत से ही जलता है इसका हर सीप।
तेरे बिना ये आँखें हैं एक सूना सा समंदर,
तेरी मोहब्बत से ही भरता है इनका हर मंजर।
तेरे बिना ये होंठ हैं एक खामोश सी सदा,
तेरी मोहब्बत से ही गूंजती है इनकी हर अदा।
हम जुर्म-ए-मोहब्बत की सज़ा पाएँगे तन्हा
जो तुझ से हुई हो वो ख़ता साथ लिए जा
साहिर लुधियानवी
दिल का रिश्ता है तुमसे हमारा
दिल के कोने में नाम है तुम्हारा
हर याद मैं है चेहरा तुम्हारा
हम साथ नहीं तो क्या हुआ
प्यार निभाने का वादा है हमारा
बहुत कुछ है पास लेकिन कुछ भी न रहा
उसकी ही जुस्तजू थीऔर वो ही न रहा
कहताथाकि इक पल न रहेंगे तेरे वगैर
हम दोनो रह गये बस वो वादा ही न रहा
“राह मुश्किल है मगर दिल को आमदा तो करो
साथ चलने का मेरे तुम इक बार इरादा तो करो
दिल बहल जाता है मेरा दोस्त तेरे वादों से
वादा वफ़ा नाकरो, मगर एक बार वादा तो करो”
की मिरे क़त्ल के बाद उस ने जफ़ा से तौबा
हाए उस ज़ूद-पशीमाँ का पशीमाँ होना
मिर्ज़ा ग़ालिब
जो आपका गुस्सा सहन करके भी
आपका ही साथ दे ,
उससे ज्यादा प्यार आपको
कोई नहीं कर सकता।
रोज पहले से कुछ अच्छी लगने लगी हो
गुलाब की पंखुड़ी लगने लगी हो
जी करता है तुम्हारे होंठो को चूम लू
तुम आजकल मधु के गगरी लगने लगी हो ।
तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना,
कि ख़ुशी से मर ना जाते, अगर एतबार होता
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तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा
मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
अमीर मीनाई
हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं
जिगर मुरादाबादी
वो अक्स बन के मिरी चश्म-ए-तर में रहता है
अजीब शख़्स है पानी के घर में रहता है
बिस्मिल साबरी
तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
सितम हो कि हो वादा-ए-बेहिजाबी
कोई बात सब्र-आज़मा चाहता हूँ
मिला था एक दिल जो तुम पर मार दिया,
हजारों भी होते तो भी तुम पर मार देते।
तेरे बाद किसी को
प्यार से न देखा हमने
हमे इश्क़ का शौक है
आवारगी का नही।
निभाने वाला सच्चा मिल जाए तो,
जीने के लिए जिंदगी कम पड़ जाती है।
माथे की शिकन हो या लबों की हसीं
रूहानी गज़ल सा है महबूब मेरा,
उन से नज़रें क्या मिलीं रौशन फ़ज़ाएँ हो गईं
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है
निदा फ़ाज़ली
क्या चाहूँ रब से
तुम्हें पाने के बाद,
किसका करूँ इंतज़ार
तेरे आने के बाद,
क्यों मोहब्बत में जान
लुटा देते हैं लोग,
मैंने भी यह जाना
इश्क़ करने के बाद,
उसने हर नशा सामने लाकर
रख दिया और कहा सबसे बुरी लत
कौन सी हैं मैने कहा तेरे प्यार की।
जो पंसद है मुझे सब महीनों में
हाँ वही खूबसूरत दिसंबर हो तुम।
जब ठिकाना ही तुम हो
तो खुशियां दुनिया में और कहां ढूंढे!
मैं और तुम के बीच
संतुलन साधता हुआ
“हम” ही तो प्रेम हैं।
उस औरत को कभी मत खोना ,
जिसने तुम्हारे सारे ऐब देखे हों
और फिर भी तुम से मुहब्बत करती हों।
तेरा जिक्र छिड़ जाए तो,
मैं पूरा कारवां बतलाने लगता हु,
और तू कितना जिंदा आज भी मेरे अंदर,
इसका यह सबूत है की,
मैं तेरी बातें करते वक्त हकलाने लगता हु.
तेरे इश्क़ की और,
हिफ़ाज़त नहीं होती,
लोग मेरी आँखो में तेरा
नाम पढ़ लेते हैं.
तू मेरे दिल पे हाथ तो रख,
हम तेरे हाथ पे दिल रख देंगे,
वो दूर रह कर इतने,
अच्छे लगते है,
सोचो पास होते तो क्या कयामत होती।
तुम चाहो तो बात को
आगे बढ़ाया जा सकता हैं
तुम हाँ कर दो तो
मेरे हाथ को तुम्हारा तकिया बनाया जा सकता हैं।
इंतजार में उसके सदियां गुज़ार दूं मैं,
जितनी बार रूठ जाएं उतनी बार मना लूं मैं ।
अगर दे जहर भी तो खुशी खुशी खुद को मार दूं मैं।
वो भुल जाएं अपने सारे दर्द गम इतना उसको प्यार दूं मैं!!
गम मिले या खुशियां
तुम आधा-आधा कर लेना
मेरी मोहब्बत कभी कम पड़े तो
तुम ज्यादा कर लेना…
पहली बात मुझे तुमसे मोहब्बत है
दूसरी बात हमारे बीच कुछ भी हो जाएं
पहली बात मत भुलना !
मेरी तलाश छोड़कर तुम मुझे महसूस करना
शायद कभी तुम्हे मै
उन पुरानी यादों में मिलूंगा।
हमसे जरा ताल्लुक से बाते किया करो ,,,
हम सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं,,,
हम वो हकीम हैं जनाब
जो लवजों से इलाज किया करते हैं.
दिल में बसाते है तुमको,
अब इश्क का इजहार करना जरूरी है क्या?
मोहब्बत है तुमसे लिख तो दिया,
अब शोर करके प्यार करना जरूरी है क्या।
मोहल्ले की मोहब्बत का भी
अजीब फसाना है
चार घर की दूरी है और
बीच में सारा जमाना है
प्यारा सा दिल,
मासूम चेहरा,
मीठी से मुस्कान..
ये तो हुई मेरी बात,
और बताओ कैसे हो आप।
शीशा टूटे ग़ुल मच जाए
दिल टूटे आवाज़ न आए
हफ़ीज़ मेरठी