कन्हैया काहे बात न मानत कृष्णा भजन
कन्हैया काहे बात न मानत कृष्णा भजन
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।
क्यूँ कर जात करन चोरी तूँ, माखन की परदोरी।
किसी की तोड़े माखन-गगरी, किसी की बाँह मरोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
कौन कमी तोहे दही माखन की, क्यूँ करबै नित चोरी।
माखन चोर सुनत गोपिन मुख, छलके आँखियाँ मोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
बोले कृष्ण सुनौ री मैया, चंचल ब्रज की गोरी।
तूँ बातन उनके आ जाती, है मन की अति भोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
नैनन सैन बुलाकर मोहे, अंग लगावत छोरी।
कोऊ लेत गोद निज अपने, लेत बलैयाँ मोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
निज हाथन मोरे मुख माखन, देत लगाय निगोरी।
जान उमर कौ बारौ मोसें, करतीं हैं बरजोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
मोसें काम करातीं घर कौ, डाल प्रेम की डोरी।
लाज लगै मोहि तोह बतावत, निरलज सिगरीं छोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
मैं क्या मोरी बला करै नहिं, काहूँ के घर चोरी।
मुदित मातु सुन बतियाँ नैनन, नीर अशोक बहोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
क्यूँ कर जात करन चोरी तूँ, माखन की परदोरी।
किसी की तोड़े माखन-गगरी, किसी की बाँह मरोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
कौन कमी तोहे दही माखन की, क्यूँ करबै नित चोरी।
माखन चोर सुनत गोपिन मुख, छलके आँखियाँ मोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
बोले कृष्ण सुनौ री मैया, चंचल ब्रज की गोरी।
तूँ बातन उनके आ जाती, है मन की अति भोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
नैनन सैन बुलाकर मोहे, अंग लगावत छोरी।
कोऊ लेत गोद निज अपने, लेत बलैयाँ मोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
निज हाथन मोरे मुख माखन, देत लगाय निगोरी।
जान उमर कौ बारौ मोसें, करतीं हैं बरजोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
मोसें काम करातीं घर कौ, डाल प्रेम की डोरी।
लाज लगै मोहि तोह बतावत, निरलज सिगरीं छोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
मैं क्या मोरी बला करै नहिं, काहूँ के घर चोरी।
मुदित मातु सुन बतियाँ नैनन, नीर अशोक बहोरी,
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी।।
कन्हैया काहे बात न मानत मोरी/Kanhaiya kahe bat na mana
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A Krishna bhajn
Written by - Shri Ashok kumar khare
Singers-Jageshwar Prasad khare & Kumari Swati khare
Chorus-Kumari Kritika khare & Kumari Swati khare
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Author - Saroj Jangir
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