श्याम इतना बता दो जरा तुम मुझे भजन
श्याम इतना बता दो जरा तुम मुझे भजन
श्याम इतना बता दो जरा तुम मुझे,
गमज़दा क्यों मेरी ज़िन्दगी रह गई,
या तो तेरे करम ने तवज्ज़ो ना दी,
या तो पूजा में मेरी कमी रह गई,
श्याम इतना बता दो।।
नाम तन मन से जब मैंने तेरा लिया,
श्याम बाबा ने सब काम मेरा किया,
रात सपने में बाबा ने दर्शन दिए,
ये नजरियाँ लड़ी, के लड़ी रह गई,
श्याम इतना बता दो।।
भक्त सहते हैं लाखों कषाएं यहाँ,
पापियों के बड़े बोल बाले यहाँ,
ऐश बंगलों में बगुला भगत कर रहे,
टूटी क्यों दास की झोपड़ी रह गई,
श्याम इतना बता दो।।
कष्ट सारा बिजेंद्र का हर लीजिए,
हाथ चंदन के सर पे भी धर दीजिए,
मन में मंदिर बना दिल में ज्योति जगा,
मेरे मन में सुरतियाँ जड़ी रह गई,
श्याम इतना बता दो।।
गमज़दा क्यों मेरी ज़िन्दगी रह गई,
या तो तेरे करम ने तवज्ज़ो ना दी,
या तो पूजा में मेरी कमी रह गई,
श्याम इतना बता दो।।
नाम तन मन से जब मैंने तेरा लिया,
श्याम बाबा ने सब काम मेरा किया,
रात सपने में बाबा ने दर्शन दिए,
ये नजरियाँ लड़ी, के लड़ी रह गई,
श्याम इतना बता दो।।
भक्त सहते हैं लाखों कषाएं यहाँ,
पापियों के बड़े बोल बाले यहाँ,
ऐश बंगलों में बगुला भगत कर रहे,
टूटी क्यों दास की झोपड़ी रह गई,
श्याम इतना बता दो।।
कष्ट सारा बिजेंद्र का हर लीजिए,
हाथ चंदन के सर पे भी धर दीजिए,
मन में मंदिर बना दिल में ज्योति जगा,
मेरे मन में सुरतियाँ जड़ी रह गई,
श्याम इतना बता दो।।
मेरे रश्के क़मर धुन पर Krishna Bhajan - Shyam Itna Bta Do - Chandan Sharma | Shyam Ji Ke Bhajan
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श्याम से सीधे और सच्चे मन से सवाल किया गया है कि जीवन में दुख और परेशानियाँ क्यों रह गईं। मन में यह द्वंद्व है कि या तो श्याम की कृपा में कोई कमी रह गई, या फिर अपनी पूजा और भक्ति में कोई त्रुटि रह गई। यह भाव गहरे आत्ममंथन और ईश्वर से संवाद का है।
जब भी तन, मन और नाम से श्याम का स्मरण किया, श्याम बाबा ने हर काम बना दिया। सपनों में भी श्याम बाबा के दर्शन हुए, लेकिन फिर भी कुछ अधूरा-सा लगता है, जैसे कोई चाहत या नजरिया अधूरा रह गया हो।
भक्त देखता है कि संसार में सच्चे भक्तों को कष्ट सहना पड़ता है, जबकि पाखंडी और पापी लोग ऐशो-आराम में हैं। झोपड़ी में रहने वाले भक्त की स्थिति क्यों नहीं बदलती, जबकि बगुला भगत (दिखावे के भक्त) सुख-सुविधा में हैं—यह प्रश्न मन को बेचैन करता है।
जब भी तन, मन और नाम से श्याम का स्मरण किया, श्याम बाबा ने हर काम बना दिया। सपनों में भी श्याम बाबा के दर्शन हुए, लेकिन फिर भी कुछ अधूरा-सा लगता है, जैसे कोई चाहत या नजरिया अधूरा रह गया हो।
भक्त देखता है कि संसार में सच्चे भक्तों को कष्ट सहना पड़ता है, जबकि पाखंडी और पापी लोग ऐशो-आराम में हैं। झोपड़ी में रहने वाले भक्त की स्थिति क्यों नहीं बदलती, जबकि बगुला भगत (दिखावे के भक्त) सुख-सुविधा में हैं—यह प्रश्न मन को बेचैन करता है।
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Author - Saroj Jangir
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