ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे,
सज सोलह श्रृंगार भवानी चांद सरीखी लागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे।
नौलख हार गले में चमके,
चुड़लो दम दम दमके,
कमर तागड़ी लड़ली लूमा,
पग पैजानियां खनके,
ममता का आंचल लहराये,
भाग्य हमारे जागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी मां,
प्यारी प्यारी लागे।
मैया के नैनों से जैसे,
अमृत बरस रहा है,
दादी जी की कृपा से तो,
जीवन महक रहा है,
उड़ने लगा है तन मन जैसे,
पंख हमारे लागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी मां,
प्यारी प्यारी लागे।
हिसार वाली दादी मेरी,
गहरी महर लुटाए,
कहे रवि जो इन्हें मनाये,
हरदम मौज उड़ाए,
भज मन दादी नाम बावरे,
यही मैया मांगे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी मां,
प्यारी प्यारी लागे।
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे,
सज सोलह श्रृंगार भवानी चांद सरीखी लागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी मां प्यारी प्यारी लागे।
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे,
सज सोलह श्रृंगार भवानी चांद सरीखी लागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे।
नौलख हार गले में चमके,
चुड़लो दम दम दमके,
कमर तागड़ी लड़ली लूमा,
पग पैजानियां खनके,
ममता का आंचल लहराये,
भाग्य हमारे जागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी मां,
प्यारी प्यारी लागे।
मैया के नैनों से जैसे,
अमृत बरस रहा है,
दादी जी की कृपा से तो,
जीवन महक रहा है,
उड़ने लगा है तन मन जैसे,
पंख हमारे लागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी मां,
प्यारी प्यारी लागे।
हिसार वाली दादी मेरी,
गहरी महर लुटाए,
कहे रवि जो इन्हें मनाये,
हरदम मौज उड़ाए,
भज मन दादी नाम बावरे,
यही मैया मांगे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी मां,
प्यारी प्यारी लागे।
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे,
सज सोलह श्रृंगार भवानी चांद सरीखी लागे,
ओढ़ के चुनड़ी बैठी मां प्यारी प्यारी लागे।
रानी सती दादी नारी शक्ति का रूप है। उनकी पूजा के समय विशेष अवसरों पर दादीजी का विशेष श्रृंगार करते हैं जिसे सोलह श्रृंगार कहा जाता है। दादीजी के दरबार को फूलों से सजाया जाता है। मेहंदी उत्सव, भजन, होली जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। रानी सती मंदिर में महोत्सव के दौरान दादीजी का भव्य श्रृंगार किया जाता है। सोलह सिंगार में दादी जी बहुत सुंदर लगती हैं । जय दादी जी।
ओढ़ के चुनड़ी बैठी दादी प्यारी प्यारी लागे II Rani Sati Dadi Special Chunri Bhajan II Ayush Tripathi
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SINGER : AYUSH TRIPATHI
LYRICS : RAVINDER KEJRIWAL 'RAVI JI '
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Author - Saroj Jangir
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