सरवर किनारे ओ बाईसा केसर मन भावे

सरवर किनारे ओ बाईसा केसर मन भावे

(मुखड़ा)
सरवर किनारे ओ बाईसा,
केसर मन भावे,
स्वर्गा सु धाम है प्यारा,
सोभा दर्शन री भारी,
केसर मन भावे।।

(अंतरा)
जन्म सुधारे वो आवरा,
बिगड़ी बनावे,
अरे दुखिया रा दुखड़ा टाले,
पण माही हेला आवे,
सरवर किनारे ओ बाईसा,
केसर मन भावे।।

(अंतरा)
सुख री मा पाला बांधे,
आनंद करावे,
आवे आँसू ढलकाता,
जावे हँसता मुस्काता,
सरवर किनारे ओ बाईसा,
केसर मन भावे।।

(अंतरा)
अरे रखवाली जामण मोटी,
आस पुरावे,
अरे देवे गोदया में बालू,
पगल्या ने पग चलावे,
सरवर किनारे ओ बाईसा,
केसर मन भावे।।

(अंतरा)
अरे बावन भैरूड़ा बजरंग,
चौंसठ जोगनिया,
ज्योता धरम री जागे,
ढोला रा धमका गाजे,
सरवर किनारे ओ बाईसा,
केसर मन भावे।।

(अंतरा)
हलकारे दौड़ी आवे,
हिवड़े लपावे,
राखे छतर री छाया,
कर देवे होरी काया,
सरवर किनारे ओ बाईसा,
केसर मन भावे।।

(अंतरा)
सिंह सवारी वो आवरा,
हड़का बलकारी,
अरे महिमा नरेश गावे,
युग युग सुरेश ध्यावे,
सरवर किनारे ओ बाईसा,
केसर मन भावे।।

(पुनरावृत्ति)
सरवर किनारे ओ बाईसा,
केसर मन भावे,
स्वर्गा सु धाम है प्यारा,
सोभा दर्शन री भारी,
केसर मन भावे।।


सरवर किनारे ओ बाईसा केसर मन भावे || SARVAR KINARE KESAR MAN BHAVE || Naresh Prajapt || New bhajan ||

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❖Singer : Naresh Prajapt
❖Song : सरवर किनारे केसर मन भावे
❖Album : Aavra mata live
❖Music Label : Maa ambe studio
❖Edited By :gauri shankar suthar

सरवर किनारे का वह पवित्र धाम, जहाँ बाईसा की कृपा बरसती है, स्वर्ग से भी प्यारा है। उनकी महिमा ऐसी है कि केसर-सी सुगंध मन को मोह लेती है। वहाँ का दर्शन आत्मा को तृप्त करता है, जैसे बारिश धरती की प्यास बुझाती है। बाईसा आवारा जनम को सुधारती हैं, बिगड़ी को बनाती हैं, और दुखियों के दुख दूर कर उनके जीवन में आनंद भर देती हैं।

जो आँसुओं के साथ उनके द्वार आता है, वह हँसता-मुस्काता लौटता है। उनकी ममता सुख का पालना झुलाती है। जैसे माँ अपने बच्चे की हर पुकार सुनती है, वैसे ही बाईसा भक्तों की आस पूरी करती हैं। गोद में बालू देती हैं, और पग-पग पर साथ निभाती हैं। बावन भैरू, बजरंग, चवसठ जोगनियाँ—सब उनके साथ हैं, जो धर्म की ज्योत जगाते हैं।
हलकारे दौड़कर भक्तों के हृदय को प्रेम से भरते हैं। बाईसा की छत्रछाया में काया पवित्र हो जाती है। सिंग असवारी, बलकारी, उनकी महिमा को नरेश गाते हैं, और युग-युग तक सुरेश ध्यान करते हैं। सरवर का वह किनारा, जहाँ बाईसा विराजती हैं, हर भक्त के लिए आनंद का स्रोत है। बस, सच्चे मन से पुकारो, केसर-सा उनका प्रेम मन को भा जाएगा।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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