बादशाह हो गए देखते देखते भजन
बादशाह हो गए देखते देखते भजन
क्या से क्या हो गए देखतेदेखते,
कल तलक जिनकी कोई भी हस्ती न थी,
बादशाह हो गए देखतेदेखते।।
जिनकी गिनती जहां के फकीरों में थी,
कोई खुशियां न जिनकी लकीरों में थी,
जो न सोचा कभी था वही हो गया,
रंक राजा हुए देखतेदेखते।
कल तलक जिनकी कोई भी हस्ती न थी,
बादशाह हो गए देखतेदेखते।।
आ गया चलके जो खाटू के गांव में,
श्याम रखता उन्हें नज़रों की छांव में,
श्याम कृपा से खुशियों के दीपक जले,
सारे ग़म सो गए देखतेदेखते।
कल तलक जिनकी कोई भी हस्ती न थी,
बादशाह हो गए देखतेदेखते।।
खाटू नगरी में चलती है ऐसी हवा,
जिससे ग़म के मरीज़ों की होती दवा,
भक्त द्वारे पे आया है जो हार के,
श्याम उनके हुए देखतेदेखते।
कल तलक जिनकी कोई भी हस्ती न थी,
बादशाह हो गए देखतेदेखते।।
तेरी रहमत से प्रेमी तेरे सांवरे,
क्या से क्या हो गए देखतेदेखते,
कल तलक जिनकी कोई भी हस्ती न थी,
बादशाह हो गए देखतेदेखते।।
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खाटू नगरी की उस मिट्टी में कुछ बात है जो साधक के हर दर्द को पल भर में मिटा देती है। जो कल तक दुनिया की नजरों में नाम भी न था, वही एक पल में इश्क के बादशाह बन जाता है। शाम जी की एक निगाह, बस वही काफी है – फकीर को राजा बना देती है, गमों को भगा देती है। हवा में घुली वो दवा हर घाव भर देती है, जैसे प्रेमी अपने सांवरे के द्वार पर सर झुकाते ही सब कुछ पा ले।
साधक जब हार कर आता है, तो इश्वर का आशर्वाद उसे नई जिंदगी देता है। शाम जी की छांव में सुख के दीपक जगमगा उठते हैं, जो कभी सोचा भी न हो वो हकीकत बन जाता है। जीवन अब बस उसी रहमत का गीत गाता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री श्याम जी।
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Author - Saroj Jangir
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