श्री बांके बिहारी स्तुति भजन
श्री बांके बिहारी स्तुति भजन
(मुखड़ा)
श्याम सलोने बांके बिहारी, महिमा इनकी सबसे न्यारी।
सर पे इनके मोर मुकुट है, हाथों में है मुरली प्यारी।।
(अंतरा)
मुरली पे जब तान ये छेड़े, भक्त सभी आते हैं दौड़े।
कुंज गलिन में बैठे बिहारी, दर्शन देते बारी-बारी।।
दर्शन इनके सबसे निराले, बार-बार पर्दा ये डाले।
परदे में छुप-छुप के देखो, करते हैं ये खेल निराले।।
खेल-खेल में पूतना मारी, खेल-खेल में कुब्जा तारी।
खेल-खेल में कंस को मारा, खेल-खेल में सबको तारा।।
तारण हारे, पालन हारे, हारे हुए के ये हैं सहारे।
जो भी इनको दिल से पुकारे, उसके बन जाते हैं सहारे।।
प्रेम भाव से ये हैं रीझते, भक्ति भाव से ये हैं मिलते।
मीरा जैसा प्रेम करो तो, विष को भी अमृत कर देते।।
ब्रज की इनको मिट्टी प्यारी, माखन के रसिया ये बिहारी।
माखन-मिश्री भोग लगाओ, प्रेम भाव से इन्हें खिलाओ।।
हाथ जोड़कर कर लो विनती, मांग लो इनसे सच्ची भक्ति।
इनकी भक्ति मिल जाए तो, भवसागर से मिलेगी मुक्ति।।
(पुनरावृति)
इनकी भक्ति मिल जाए तो, भवसागर से मिलेगी मुक्ति।।
श्याम सलोने बांके बिहारी, महिमा इनकी सबसे न्यारी।
सर पे इनके मोर मुकुट है, हाथों में है मुरली प्यारी।।
(अंतरा)
मुरली पे जब तान ये छेड़े, भक्त सभी आते हैं दौड़े।
कुंज गलिन में बैठे बिहारी, दर्शन देते बारी-बारी।।
दर्शन इनके सबसे निराले, बार-बार पर्दा ये डाले।
परदे में छुप-छुप के देखो, करते हैं ये खेल निराले।।
खेल-खेल में पूतना मारी, खेल-खेल में कुब्जा तारी।
खेल-खेल में कंस को मारा, खेल-खेल में सबको तारा।।
तारण हारे, पालन हारे, हारे हुए के ये हैं सहारे।
जो भी इनको दिल से पुकारे, उसके बन जाते हैं सहारे।।
प्रेम भाव से ये हैं रीझते, भक्ति भाव से ये हैं मिलते।
मीरा जैसा प्रेम करो तो, विष को भी अमृत कर देते।।
ब्रज की इनको मिट्टी प्यारी, माखन के रसिया ये बिहारी।
माखन-मिश्री भोग लगाओ, प्रेम भाव से इन्हें खिलाओ।।
हाथ जोड़कर कर लो विनती, मांग लो इनसे सच्ची भक्ति।
इनकी भक्ति मिल जाए तो, भवसागर से मिलेगी मुक्ति।।
(पुनरावृति)
इनकी भक्ति मिल जाए तो, भवसागर से मिलेगी मुक्ति।।
श्री बांके बिहारी स्तुति ।। श्याम सलोने बांके बिहारी ।। #bankebihari #vrindavan #radhe #krishna
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श्याम बांके बिहारी का रूप और उनकी लीला मन को मोह लेने वाली है। मोर मुकुट और मुरली से सजे, वे कुंज गलियों में भक्तों को दर्शन देकर आनंद बिखेरते हैं। उनकी मुरली की तान हर हृदय को खींच लाती है, और परदे के पीछे से उनकी छुपम-छुपाई का खेल प्रेम को और गहरा करता है। खेल-खेल में पूतना, कंस को मारकर और कुब्जा को तारकर उन्होंने सिखाया कि उनकी कृपा हर हारे हुए का सहारा है। मीरा-सा प्रेम करने वाला विष को भी अमृत बना लेता है, क्योंकि श्याम प्रेम और भक्ति से ही रीझते हैं। ब्रज की मिट्टी और माखन के रसिया, वे सच्चे मन से लगाए भोग को स्वीकारते हैं। यह भक्ति का रस है, जो मन को उनकी विनती में झुका देता है, और उनकी शरण में भवसागर से मुक्ति का मार्ग खोलता है।
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Author - Saroj Jangir
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