हरी गुण गा ले रे भाई मेरे जब तक निरोगी शरीर भजन

हरी गुण गा ले रे भाई मेरे जब तक निरोगी शरीर भजन

हरी गुण गा ले रे भाई मेरे,
जब तक निरोगी शरीर।
आगे बुढ़ापा आना है,
उठे काया में बड़ी पीर।
हरी गुण गा ले रे भाई मेरे,
जब तक निरोगी शरीर।

भाग थे मेरे बड़े बलवान,
संतों का साथ जो पाया,
सतसंग में डुबकी लगा,
हरी नाम का मोती पाया,
बन हंस, मोती चुन ले रे बन्दे,
हरी नाम अमोलक हीर।
हरी गुण गा ले रे भाई मेरे,
जब तक निरोगी शरीर

समय तेरा ऐसे  बीत रहा, 
ज्यों अंजलि का नीर,
हंसा फिर ना लौटेगा सरोवर,
छूट गया जब तीर।
गया समय फिर हाथ न आए,
रहे न मन में धीर।
हरी गुण गा ले रे भाई मेरे,
जब तक निरोगी शरीर।

हरी गुण गा ले रे भाई मेरे,
जब तक निरोगी शरीर।
आगे बुढ़ापा आना है,
उठे काया में बड़ी पीर।
हरी गुण गा ले रे भाई मेरे,
जब तक निरोगी शरीर।


Hari Gun Gaa Le Bhai Mere 2026 Devotional Bhajan

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Lyrics : Saroj Jangir (Lyricspandits)
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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