छोड़ के सारी मोह माया, तेरे दर पे आन पड़ा, अब तो दर्श दिखा श्याम जी।
सावन बिता भादो बीता, फागण की आस लगाई, मेरी बारी खाटू वाले, काहे देर लगाई, अखियां थक गई आस में तेरी, आके धीर बंधा , अब तो दर्श दिखा श्याम जी।
थारी पूजा घर घर होती, चर्चा बहुत है थारा, उसकी अर्जी सुन लेते हो, जिसने तुझे पुकारा, म्हा से कुण सी गलती हो गई, दे रहो है सजा, अब तो दर्श दिखा श्याम जी।
जग में सुनिया खाटू माहीं लाग्यो मेलो भारी हर मेरी अड़चन बीच में आ गई, जब मैंने करी तैयारी, ऐसे खेल तू रच देते हो, कोई तो होगी वजह, अब तो दर्श दिखा श्याम जी।
देख कदे बहक ना जाये, दास तेरो परवाना, तेरी बाट उडीक रहे हो, पागल कहे जमाना, भूल चूक क्षमा तू करदे, हिवड़े म्हाने लगा, अब तो दर्श दिखा श्याम जी।