करूणा भरे कृपा भरे मेरे बांके बिहारी सरकार
करूणा भरे कृपा भरे मेरे बांके बिहारी सरकार
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार…
जय मंजुल कुंजीन कुंजन की,
रस कुंज विचित्र समाज की जय जय,
यमुना तट बंसीवट की,
गिरिजेश्वर की गिरिराज की जय जय,
ब्रज गोपियन गोप कुमारन की,
विपिणेश्वर के सुख साज़ की जय जय,
ब्रज के सब संतन की,
ब्रज मंडल की ब्रज राज की जय जय,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार…
रंग प्रेम भरा बरसा करके,
बरसों की वियोग व्यथा हर ले,
मन मेरा मयूर सा नाच उठे,
कुछ भावना भाव नया भर दे,
कुछ भावना भाव नया भर दे,
जलती इस छाती की ज्वाला मिटे,
अपना पद कंज ज़रा धर दे,
हँस दे हँस दे, द्रिग फिर अगर,
नट नागर नेक कृपा कर दे,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार…
नहीं चित्र लिखा, न चरित्र सुना,
वह सुंदर श्याम को जाने ही क्या,
मन में है बसा मन मोहन जो,
वो ठान किसी पर ठाने ही क्या,
जिस बंदर ने ईमली ही चखी,
वो स्वाद सुधा पहचाने ही क्या,
जिसने हरी प्रेम किया ही नहीं,
वह प्रेम की आह को जाने ही क्या,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार…
मेरे बांके बिहारी सरकार,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार…
जय मंजुल कुंजीन कुंजन की,
रस कुंज विचित्र समाज की जय जय,
यमुना तट बंसीवट की,
गिरिजेश्वर की गिरिराज की जय जय,
ब्रज गोपियन गोप कुमारन की,
विपिणेश्वर के सुख साज़ की जय जय,
ब्रज के सब संतन की,
ब्रज मंडल की ब्रज राज की जय जय,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार…
रंग प्रेम भरा बरसा करके,
बरसों की वियोग व्यथा हर ले,
मन मेरा मयूर सा नाच उठे,
कुछ भावना भाव नया भर दे,
कुछ भावना भाव नया भर दे,
जलती इस छाती की ज्वाला मिटे,
अपना पद कंज ज़रा धर दे,
हँस दे हँस दे, द्रिग फिर अगर,
नट नागर नेक कृपा कर दे,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार…
नहीं चित्र लिखा, न चरित्र सुना,
वह सुंदर श्याम को जाने ही क्या,
मन में है बसा मन मोहन जो,
वो ठान किसी पर ठाने ही क्या,
जिस बंदर ने ईमली ही चखी,
वो स्वाद सुधा पहचाने ही क्या,
जिसने हरी प्रेम किया ही नहीं,
वह प्रेम की आह को जाने ही क्या,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार,
करूणा भरे कृपा भरे,
मेरे बांके बिहारी सरकार…
करुणा भरे कृपा भरे मेरे बांके बिहारी सरकार ~ Baba Chitra Vichitra Ji Maharaj ~ Skylark Infotainment
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बांके बिहारी की करुणा और कृपा से जीवन में सुख, शांति और प्रेम की वर्षा होती है। उनकी मधुर छवि, ब्रज की गलियों, यमुना तट, बंसीवट, गिरिराज और ब्रज मंडल की महिमा का स्मरण करते ही मन आनंद से भर उठता है। ब्रज की गोपियां, गोप कुमार, संत और समूचा ब्रजधाम उनकी लीला और प्रेम से पावन हो जाता है।
जब बांके बिहारी प्रेम और रंग की वर्षा करते हैं, तो वर्षों की वियोग की पीड़ा भी मिट जाती है। मन मोर की तरह झूम उठता है और भीतर नया उत्साह, नई भावना जाग उठती है। जीवन की ज्वाला, दुख और बेचैनी उनके चरणों की छाया में शांत हो जाती है। उनकी एक मुस्कान, एक कृपा दृष्टि ही जीवन को संपूर्ण बना देती है। जो केवल चित्र या चरित्र की बातें सुनते हैं, वे उस सुंदर श्याम की गहराई को नहीं समझ सकते। मन में जिसने उन्हें बसा लिया, वही सच्चे प्रेम का स्वाद जानता है। जैसे जिसने कभी इमली नहीं चखी, वह उसका स्वाद नहीं जान सकता, वैसे ही जिसने हरी प्रेम नहीं किया, वह उस प्रेम की मिठास को नहीं जान सकता।
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चाँदी का पालना लायो मारा सेठ जी भजन
बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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बांके बिहारी की करुणा और कृपा से जीवन में सुख, शांति और प्रेम की वर्षा होती है। उनकी मधुर छवि, ब्रज की गलियों, यमुना तट, बंसीवट, गिरिराज और ब्रज मंडल की महिमा का स्मरण करते ही मन आनंद से भर उठता है। ब्रज की गोपियां, गोप कुमार, संत और समूचा ब्रजधाम उनकी लीला और प्रेम से पावन हो जाता है।
जब बांके बिहारी प्रेम और रंग की वर्षा करते हैं, तो वर्षों की वियोग की पीड़ा भी मिट जाती है। मन मोर की तरह झूम उठता है और भीतर नया उत्साह, नई भावना जाग उठती है। जीवन की ज्वाला, दुख और बेचैनी उनके चरणों की छाया में शांत हो जाती है। उनकी एक मुस्कान, एक कृपा दृष्टि ही जीवन को संपूर्ण बना देती है। जो केवल चित्र या चरित्र की बातें सुनते हैं, वे उस सुंदर श्याम की गहराई को नहीं समझ सकते। मन में जिसने उन्हें बसा लिया, वही सच्चे प्रेम का स्वाद जानता है। जैसे जिसने कभी इमली नहीं चखी, वह उसका स्वाद नहीं जान सकता, वैसे ही जिसने हरी प्रेम नहीं किया, वह उस प्रेम की मिठास को नहीं जान सकता।
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Author - Saroj Jangir
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