मधुबन में झूला झूल रहे राधेश्याम मदन मुरारी
मधुबन में झूला झूल रहे राधेश्याम मदन मुरारी
मधुबन में झूला झूल रहे
राधेश्याम मदन मुरारी
राधे श्याम मदन मुरारी
राधे श्याम कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
मोर मुकुट कानों में कुंडल
रूप निहारत सब ब्रजमंडल
दर्शन कर सुद्ध बुद्ध भूल रहे
राधे संग कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
खड़ा मनसुखा लेकर सोटा
सखियां दे रही लंबे झोटा
अंबर में बादल झूम रहे
राधे श्याम कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
कूक रही है कोयल काली
लता पत्ता छाई हरियाली
बागों में कलियां महक रही
राधे श्याम कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
प्रेमी ब्रिज लागे मनभावन
रिमझिम रिमझिम बरसे सावन
सब गोपी ग्वाला झूम रहे
राधे श्याम कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
राधेश्याम मदन मुरारी
राधे श्याम मदन मुरारी
राधे श्याम कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
मोर मुकुट कानों में कुंडल
रूप निहारत सब ब्रजमंडल
दर्शन कर सुद्ध बुद्ध भूल रहे
राधे संग कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
खड़ा मनसुखा लेकर सोटा
सखियां दे रही लंबे झोटा
अंबर में बादल झूम रहे
राधे श्याम कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
कूक रही है कोयल काली
लता पत्ता छाई हरियाली
बागों में कलियां महक रही
राधे श्याम कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
प्रेमी ब्रिज लागे मनभावन
रिमझिम रिमझिम बरसे सावन
सब गोपी ग्वाला झूम रहे
राधे श्याम कुंज बिहारी
मधुबन में झूला झूल रहे
MADHUBAN ME JHULA JHOOL RAHE RADHE SANG MADAN MURARI
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मधुबन में सावन की हरियाली और उमंग के बीच राधा और श्याम झूला झूल रहे हैं। कदम्ब की डाल पर मोर मुकुट और कानों में कुंडल पहने श्याम, अपनी अनुपम छवि से पूरे ब्रजमंडल को मोह लेते हैं। उनकी सुंदरता और राधा संग उनका झूला झूलना, ब्रजवासियों के लिए दिव्य आनंद का क्षण है। सबकी निगाहें बस राधा-श्याम की छवि पर टिक जाती हैं, और उनके दर्शन में लोग सुध-बुध खो बैठते हैं।
सखियाँ झूला झुलाती हैं, अम्बर में बादल झूम रहे हैं, कोयल की कूक और लता-पत्तों की हरियाली वातावरण को और भी मधुर बना देती है। बागों में फूलों की खुशबू फैली है, और प्रेम में डूबे ब्रजवासी, गोपियाँ और ग्वाले, सब सावन की रिमझिम फुहार में झूम रहे हैं। राधा-श्याम का यह झूला, प्रेम, आनंद और भक्ति का उत्सव बन जाता है, जिसमें पूरा ब्रज मगन हो जाता है।
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बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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सखियाँ झूला झुलाती हैं, अम्बर में बादल झूम रहे हैं, कोयल की कूक और लता-पत्तों की हरियाली वातावरण को और भी मधुर बना देती है। बागों में फूलों की खुशबू फैली है, और प्रेम में डूबे ब्रजवासी, गोपियाँ और ग्वाले, सब सावन की रिमझिम फुहार में झूम रहे हैं। राधा-श्याम का यह झूला, प्रेम, आनंद और भक्ति का उत्सव बन जाता है, जिसमें पूरा ब्रज मगन हो जाता है।
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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