
भोले तेरी भक्ति का अपना ही
इस शेर में मीर तकी मीर प्रेम के रस में डूबे हुए व्यक्ति की स्थिति का वर्णन करते हैं। वह कहते हैं कि प्रेम में मनुष्य को धैर्य और संयम कहाँ रह जाता है। जब वह अपने प्रेमी या प्रेमिका को देखता है, तो उसके सभी सपने दूर हो जाते हैं। वह बेचैन हो जाता है और उसे तड़प होती है। उसकी अपनी हस्ती उसके बीच में एक पर्दा बन जाती है। वह अपने प्रेमी या प्रेमिका के बिना अपने अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकता। वह रातभर जागता रहता है और अपने प्रेमी या प्रेमिका के बारे में सोचता रहता है। वह शराब पीकर अपनी पीड़ा को कम करने की कोशिश करता है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिलती। वह कहता है कि प्रेम ही आशिक़ों को जलने के लिए है। जहन्नुम में जो अज़ाब होता है, वह उससे कम है। वह कहता है कि प्रेमियों को किताबों से क्या मतलब? वे तो प्रेम में डूबे हुए हैं। वह कहता है कि इश्क़ का घर 'मीर' से आबाद है। ऐसे फिर ख़ानमाँख़राब कहाँ? मीर का मतलब है कि इश्क़ में डूबे हुए व्यक्ति को दुनिया की कोई चिंता नहीं रहती। वह अपने प्रेमी या प्रेमिका के लिए सब कुछ त्याग सकता है।
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