फागणियो आग्यो जी चालो जी चालां श्याम के लिरिक्स

फागणियो आग्यो जी चालो जी चालां श्याम के लिरिक्स

फागणियो आग्यो जी,
चालो जी चालां श्याम के
फागणियो आग्यो जी,
म्हारे मनडे भा गया जी,
चालो जी चालो श्याम के।

सबसो पहला टिकट कटवा ल्यो,
भीड़ मोगली हो सी,
टाबरिया ने साथ राख के,
खो जावे तो रोसी,
धक्का मुक्की देख के भाया,
मत घबरइयो,
मीठा मीठा भजन सुना कर,
आगे बढता जाइयो,
फागणियो आग्यो जी,
चालो जी चालां श्याम के।

श्याम बगीची गुरु आलू सिंह,
बेठ्या ध्यान लगायां
रंग बिरंगे फुला से,
बाबा को ख़ूब सजाया,
सारा खाटू महके भाया,
इतर की खुशबू से,
प्रेमी चलो नैना लड़ा ल्यों,
खाटू श्याम प्रभु से,
फागणियो आग्यो जी,
चालो जी चालां श्याम के।

अमृत जो जल श्याम कुण्ड को,
भाया दुबकी लगले,
खीर चुरमो भोग लगा के,
ग्यारस रात जगा ले,
परस में मंदिर में जा कर,
भया भोग लगा लो,
भोग लगा के श्याम धणी से,
मन चाहा फल पावो,
फागणियो आग्यो जी,
चालो जी चालां श्याम के।

होली के दिन सांवरिया,
भगता के रंग लगवाए,
लगे अखाडा आँगन में,
सबने नाच नचावे,
और धणी बाता में लेकी,
देखियाँ समझ में ना आवे
बिन्नू जितना देख चुके हैं,
भगता ने बतलावे,
फागणियो आग्यो जी,
चालो जी चालां श्याम के। 

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