मालिक को भूल नहीं प्यारे भजन

मालिक को भूल नहीं प्यारे भजन

मालिक को भूल नहीं प्यारे भजन

मालिक को भूल नहीं प्यारे,
जमरा मुश्किल से आया है।

कई युगों से तू भटका,
लख चौरासी में अटका,
बार बार जनि में लटका,
मानुष तन दुर्लभ पाया है,
मालिक को भूल नहीं प्यारे,
जमरा मुश्किल से आया है।

धन और धाम नहीं तेरा,
तू कहता कुटुम्ब है मेरा,
अंत में काल ने घेरा,
नहीं तेरी ये काया है,
मालिक को भूल नहीं प्यारे,
जमरा मुश्किल से आया है।

प्रभु ने रूप दिया भारी,
बन बैठा तू बलकारी,
सुध-बुध भूल गया सारी,
चित से क्यों राम भुलाया है,
मालिक को भूल नहीं प्यारे,
जमरा मुश्किल से आया है।

गुरु लूम्बानाथ शरणा,
सत्संग बिना कैसे हो तिरना,
बलवन्त कुछ काल से डरना,
संतों ने यूं फरमाया है,
मालिक को भूल नहीं प्यारे,
जमरा मुश्किल से आया है।

मालिक को भूल नहीं प्यारे,
जमरा मुश्किल से आया है।



भजन : कब से तुम्हें पुकारूं राम (लेखक व स्वर : सुरेश सूद "श्याम" )#Like

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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