बाई सा रा बीरा जयपुर जाज्यो जी सोंग
यह गीत एक विवाहित महिला द्वारा गाया जाता है, जो अपने पति से दूर रह रही है। अपने पति से जयपुर से अपनी चुनरी लाने के लिए कहती है अपनी चुनरी के बिना अधूरी है। गीत के पहले दो छंदों में, महिला अपने पति से जयपुर से अपनी चुनरी लाने के लिए कहती है।
Taara Ri Chundadi (Rajasthani Folk Songs) - Ghoomar Vol.
बाई सा रा बीरा,
जेपुर (जयपुर) जा ज्यो जी
बठे सू ल्याईज्यो
तारा री चुन्दडी
बाई सा रा बीरा,
जेपुर (जयपुर) जा ज्यो जी
बठे सू ल्याईज्यो
तारा री चुन्दडी
मोर बोले रे ओ मलजी
आबू रे पाड़ा (पहाड़ो ) में
ओ मलजी मोर बोले रे ओ मलजी
कीकर (कैसे) आऊ, ओ मलजी
फाटेड़े (फटा हुआ ) घाघरिये (घाघरा)
ओ मलजी कीकर आऊ ओ,
इण लहरिये (चुनड़ी) रे
अल्ले पल्ले घुघरा (घुंघरू) सा,
म्हाने ल्याई द्यो नी
बादिला ढोला,
लहरियों सा
म्हाने ल्याई द्यो नी,
जोड़ी रा बालम,
लहरियों सा
म्हाने ल्याई द्यो नी
जोड़ी रा ढोला,
लहरियों सा
म्हाने ल्याई द्यो नी
जोड़ी रा ढोला,
लहरियों सा
लड़ली लूमा रे झूमा ए ....
म्हारो गोरबंद नखरालो
आलीजा म्हारो गोरबंद नखरालो
लड़ली लूमा रे झूमा ए ....
म्हारो गोरबंद नखरालो
आलीजा म्हारो गोरबंद नखरालो
आवण जावण कह गया
कर गया कोल अनेक
गिनता गिनता घस गयी
म्हारी आंगलिया (अंगुली की ) री रेख
कद आवो म्हारा छैला
जोवा थारी बाट घणी
आवे थारी याद घणी
टूटे बाजू बंद री लूम
लड़ (लटकण) उलझी उलझी जाय
टूटे बाजू बंद री लूम
लड़ (लटकण) उलझी उलझी जाय
कोई पचरंगी लहरियारो
पल्लो लहराय
होले (धीरे ) हालो (चलो ) नी बायरिया (हवा)
झालो (झटका ) सह्या नयी जाय
होले (धीरे ) हालो (चलो ) नी बायरिया (हवा)
झालो (झटका ) सह्या नयी जाय
पल्लो लटके रे म्हारो पल्लो लटके,
पल्लो लटके रे म्हारो पल्लो लटके,
जरा सो .....जरा सो...
टेढो हो ज्या बालमा
म्हारो पल्लो लटके
जेपुर (जयपुर) जा ज्यो जी
बठे सू ल्याईज्यो
तारा री चुन्दडी
बाई सा रा बीरा,
जेपुर (जयपुर) जा ज्यो जी
बठे सू ल्याईज्यो
तारा री चुन्दडी
मोर बोले रे ओ मलजी
आबू रे पाड़ा (पहाड़ो ) में
ओ मलजी मोर बोले रे ओ मलजी
कीकर (कैसे) आऊ, ओ मलजी
फाटेड़े (फटा हुआ ) घाघरिये (घाघरा)
ओ मलजी कीकर आऊ ओ,
इण लहरिये (चुनड़ी) रे
अल्ले पल्ले घुघरा (घुंघरू) सा,
म्हाने ल्याई द्यो नी
बादिला ढोला,
लहरियों सा
म्हाने ल्याई द्यो नी,
जोड़ी रा बालम,
लहरियों सा
म्हाने ल्याई द्यो नी
जोड़ी रा ढोला,
लहरियों सा
म्हाने ल्याई द्यो नी
जोड़ी रा ढोला,
लहरियों सा
लड़ली लूमा रे झूमा ए ....
म्हारो गोरबंद नखरालो
आलीजा म्हारो गोरबंद नखरालो
लड़ली लूमा रे झूमा ए ....
म्हारो गोरबंद नखरालो
आलीजा म्हारो गोरबंद नखरालो
आवण जावण कह गया
कर गया कोल अनेक
गिनता गिनता घस गयी
म्हारी आंगलिया (अंगुली की ) री रेख
कद आवो म्हारा छैला
जोवा थारी बाट घणी
आवे थारी याद घणी
टूटे बाजू बंद री लूम
लड़ (लटकण) उलझी उलझी जाय
टूटे बाजू बंद री लूम
लड़ (लटकण) उलझी उलझी जाय
कोई पचरंगी लहरियारो
पल्लो लहराय
होले (धीरे ) हालो (चलो ) नी बायरिया (हवा)
झालो (झटका ) सह्या नयी जाय
होले (धीरे ) हालो (चलो ) नी बायरिया (हवा)
झालो (झटका ) सह्या नयी जाय
पल्लो लटके रे म्हारो पल्लो लटके,
पल्लो लटके रे म्हारो पल्लो लटके,
जरा सो .....जरा सो...
टेढो हो ज्या बालमा
म्हारो पल्लो लटके
बाई सा रा बीरा,
जेपुर (जयपुर) जा ज्यो जी
बठे सू ल्याईज्यो
तारा री चुन्दडी
Taara Ri Chundadi (Rajasthani Folk Songs) - Ghoomar Vol.
राजस्थानी महिलाओं के लिए चुनरी एक महत्वपूर्ण परिधान है। यह महिलाओं की सुंदरता और सम्मान का प्रतीक है। राजस्थानी लोकगीतों में नायिका को अक्सर चुनरी पहने हुए दिखाया जाता है। घाघरा एक लंबा, फ़र्श तक लंबा परिधान है जो महिलाओं द्वारा पहना जाता है। यह आमतौर पर रेशम या अन्य महंगे कपड़े से बनाया जाता है। राजस्थानी लोकगीतों में नायिका को अक्सर घाघरा पहने हुए दिखाया जाता है।
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