मिल मेरे प्रीतमा जिओ तुझ बिन खड़ी निमाणी
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी,
मैं नैनी नींद ना आवै जीओ, भावै अन्न ना पानी,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
पानी अन्न ना भावै, मरिए हावे, बिन पिर किउ सुख पाइये,
गुर आगे करु बेन्नती, जे गुर भावै, जो मिले तिवे मिलाइये,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
आपे मिल लए सुख दाता,आप मिलया घर आये,
नानक कामन सदा सुहागन, ना पीर मारे ना जाये,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
मैं नैनी नींद ना आवै जीओ, भावै अन्न ना पानी,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
पानी अन्न ना भावै, मरिए हावे, बिन पिर किउ सुख पाइये,
गुर आगे करु बेन्नती, जे गुर भावै, जो मिले तिवे मिलाइये,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
आपे मिल लए सुख दाता,आप मिलया घर आये,
नानक कामन सदा सुहागन, ना पीर मारे ना जाये,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
Mil Mere Pritama Jiyo - Bhai Ravinder Singh Ji and Jatha Ji
Mil Mere Preetama Jio, Tujh Bin Khadee Nimaanee,
Main Nainee Neend Na Aavai Jeeo, Bhaavai Ann Na Paanee,
Mil Mere Preetama Jio, Tuz Bin Khadee Nimaanee.
Meet me, O my Dear Beloved. Without You, I am totally dishonored.
Sleep does not come to my eyes, and I have no desire for food or water.
I have no desire for food or water, and I am dying from the pain of separation. Without my Husband Lord, how can I find peace?
I offer my prayers to the Guru; if it pleases the Guru, He shall unite me with Himself.
The Giver of peace has united me with Himself; He Himself has come to my home to meet me.
O Nanak, the soul-bride is forever the Lord's favorite wife; her Husband Lord does not die, and He shall never leave. ||4||2||
Main Nainee Neend Na Aavai Jeeo, Bhaavai Ann Na Paanee,
Mil Mere Preetama Jio, Tuz Bin Khadee Nimaanee.
Meet me, O my Dear Beloved. Without You, I am totally dishonored.
Sleep does not come to my eyes, and I have no desire for food or water.
I have no desire for food or water, and I am dying from the pain of separation. Without my Husband Lord, how can I find peace?
I offer my prayers to the Guru; if it pleases the Guru, He shall unite me with Himself.
The Giver of peace has united me with Himself; He Himself has come to my home to meet me.
O Nanak, the soul-bride is forever the Lord's favorite wife; her Husband Lord does not die, and He shall never leave. ||4||2||
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी,
मैं नैनी नींद ना आवै जीओ, भावै अन्न ना पानी,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
अर्थ: हे मेरे प्रीतम (प्रिय), मेरे जीवन का असली सुख केवल तुझसे मिलकर है। तेरे बिना मैं अधूरी हूं, मेरी आंखों को नींद नहीं आती और मुझे खाना-पीना भी अच्छा नहीं लगता। सिर्फ तुझसे मिलने से मेरी आत्मा को शांति मिलती है।
पानी अन्न ना भावै, मरिए हावे, बिन पिर किउ सुख पाइये,
गुर आगे करु बेन्नती, जे गुर भावै, जो मिले तिवे मिलाइये,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
अर्थ: जब तक मुझे अपने प्रिय का प्यार और साथ नहीं मिलता, तब तक जीवन के साधारण सुख, जैसे पानी और अन्न, भी मुझे निरर्थक लगते हैं। बिना प्रिय के जीवन में कोई सुख नहीं मिल सकता। इसलिए मैं गुरु से प्रार्थना करता हूं कि वह मुझे मेरे प्रिय से मिलवा दें, क्योंकि जब वह प्रिय मुझे मिलता है, तब मेरी आत्मा को सच्ची शांति और सुख मिलता है।
आपे मिल लए सुख दाता, आप मिलया घर आये,
नानक कामन सदा सुहागन, ना पीर मारे ना जाये,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
अर्थ: स्वयं भगवान (सुखदाता) ने मुझे मिलाकर मुझे सुख दिया और मेरे घर में प्रेम लाया। गुरु नानक जी के अनुसार, जब सच्ची प्रेम और सुख की प्राप्ति होती है, तो व्यक्ति कभी दुखी नहीं होता और न ही किसी परेशानी में घिरता है। मेरे प्रीतम से मिलने से ही मेरी आत्मा को पूरी शांति और संतोष मिलता है।
मैं नैनी नींद ना आवै जीओ, भावै अन्न ना पानी,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
अर्थ: हे मेरे प्रीतम (प्रिय), मेरे जीवन का असली सुख केवल तुझसे मिलकर है। तेरे बिना मैं अधूरी हूं, मेरी आंखों को नींद नहीं आती और मुझे खाना-पीना भी अच्छा नहीं लगता। सिर्फ तुझसे मिलने से मेरी आत्मा को शांति मिलती है।
पानी अन्न ना भावै, मरिए हावे, बिन पिर किउ सुख पाइये,
गुर आगे करु बेन्नती, जे गुर भावै, जो मिले तिवे मिलाइये,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
अर्थ: जब तक मुझे अपने प्रिय का प्यार और साथ नहीं मिलता, तब तक जीवन के साधारण सुख, जैसे पानी और अन्न, भी मुझे निरर्थक लगते हैं। बिना प्रिय के जीवन में कोई सुख नहीं मिल सकता। इसलिए मैं गुरु से प्रार्थना करता हूं कि वह मुझे मेरे प्रिय से मिलवा दें, क्योंकि जब वह प्रिय मुझे मिलता है, तब मेरी आत्मा को सच्ची शांति और सुख मिलता है।
आपे मिल लए सुख दाता, आप मिलया घर आये,
नानक कामन सदा सुहागन, ना पीर मारे ना जाये,
मिल मेरे प्रीतमा जिओ, तुझ बिन खड़ी निमाणी।
अर्थ: स्वयं भगवान (सुखदाता) ने मुझे मिलाकर मुझे सुख दिया और मेरे घर में प्रेम लाया। गुरु नानक जी के अनुसार, जब सच्ची प्रेम और सुख की प्राप्ति होती है, तो व्यक्ति कभी दुखी नहीं होता और न ही किसी परेशानी में घिरता है। मेरे प्रीतम से मिलने से ही मेरी आत्मा को पूरी शांति और संतोष मिलता है।
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Author - Saroj Jangir
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