कभी अगले क्षण के भरोसे ना रहना भजन
कभी अगले क्षण के भरोसे ना रहना भजन
ये तन कीमती है,
मगर है विनाशी,
कभी अगले क्षण के,
भरोसे ना रहना,
निकल जाएगी छोड़,
काया को पल में,
सदा श्वास-धन के,
भरोसे ना रहना।
एक क्षण में योगी,
एक क्षण में भोगी,
पल भर में ज्ञानी,
पल में वियोगी,
बदलता जो क्षण-क्षण,
में है वृत्ति अपनी,
सदा अपने मन के,
भरोसे ना रहना।
हम सोचते काम,
दुनिया के करले,
धन-धाम अर्जित,
कर नाम कर ले,
फिर एक दिन बन,
के साधु रहेंगे,
उस एक दिन के,
भरोसे ना रहना।
तुमको जो मेरा,
मेरा कहेंगे,
जरूरी नहीं है वो भी,
तेरे रहेंगे,
मतलब से मिलते हैं,
दुनिया के साथी,
सदा इस मिलन के,
भरोसे ना रहना।
राजेश अर्जित,
गुरु ज्ञान कर लो,
या प्रेम से राम,
गुणगान कर लो,
अथवा श्री राम नाम,
रटो नित नियम से,
किसी अन्य गुण के,
भरोसे ना रहना।
ये तन कीमती है,
मगर है विनाशी,
कभी अगले क्षण के,
भरोसे ना रहना,
निकल जाएगी छोड़,
काया को पल में,
सदा श्वास-धन के,
भरोसे ना रहना।
मगर है विनाशी,
कभी अगले क्षण के,
भरोसे ना रहना,
निकल जाएगी छोड़,
काया को पल में,
सदा श्वास-धन के,
भरोसे ना रहना।
एक क्षण में योगी,
एक क्षण में भोगी,
पल भर में ज्ञानी,
पल में वियोगी,
बदलता जो क्षण-क्षण,
में है वृत्ति अपनी,
सदा अपने मन के,
भरोसे ना रहना।
हम सोचते काम,
दुनिया के करले,
धन-धाम अर्जित,
कर नाम कर ले,
फिर एक दिन बन,
के साधु रहेंगे,
उस एक दिन के,
भरोसे ना रहना।
तुमको जो मेरा,
मेरा कहेंगे,
जरूरी नहीं है वो भी,
तेरे रहेंगे,
मतलब से मिलते हैं,
दुनिया के साथी,
सदा इस मिलन के,
भरोसे ना रहना।
राजेश अर्जित,
गुरु ज्ञान कर लो,
या प्रेम से राम,
गुणगान कर लो,
अथवा श्री राम नाम,
रटो नित नियम से,
किसी अन्य गुण के,
भरोसे ना रहना।
ये तन कीमती है,
मगर है विनाशी,
कभी अगले क्षण के,
भरोसे ना रहना,
निकल जाएगी छोड़,
काया को पल में,
सदा श्वास-धन के,
भरोसे ना रहना।
कभी अगले छड़ के भरोसे न रहना llश्री राजेश्वरानंद जी
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संगीतमय श्री राम कथा के प्रवक्ता के रूप में भारत की संस्कृति को गौरवान्वित करने वाले अमूल्य रत्न पूज्य श्री स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज राजेश रामायणी जी पुज्य श्री महाराज जी आपका इस तरह अचानक चला जाना मेरे लिए बहुत कस्ट दायक हुआ। पूज्य श्री स्वामी जी आप साक्षात गोस्वामी तुलसीदास जी के अवतार ही थे। श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस की रचना की पर जिस हृदय भाव से रचना की उस हृदय भाव का इस बसुन्धरा पर कोई दर्षाने वाला नहीं हुआ। तो उसकी पूर्ति करने के लिए आप श्री तुलसी दास जी महराज श्री राजेश रामायणी वनकर आते। और हम अधीन अधमो का उद्धार किया। पूज्य श्री स्वामी राजेश्वरानंद जी का इस तरह अचानक चला जाना मुझे कस्ट दायक हुआ। और अब मुझे सूनापन महसूस हो रहा है। पूज्य श्री स्वामी जी का बैकुंठ बासी हो जाना में अपने जीवन की छति समझता हूं। लेकिन मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि भगवान पूज्य श्री स्वामी राजेश्वरानंद जी को अपने चरणों में वास दें।
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Author - Saroj Jangir
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