मेरा गोपाल गिरधारी जमाने से निराला भजन

मेरा गोपाल गिरधारी जमाने से निराला भजन

मेरा गोपाल गिरधारी,
जमाने से निराला है,
रंगीला है रसीला है,
ना गोरा है ना काला है।

कभी सपनों में आ जाना,
कभी रूपोश हो जाना,
यह तरसाने का मोहन ने,
निराला ढंग निकाला है।

कभी वह रूठ जाता है,
कभी वह मुस्कुराता है,
इसी दर्शन की खातिर तो,
बड़े नाजो से पाला है।

मजे से दिल में आ बैठो,
मेरे नैनों में बस जाओ,
अरे गोपाल मंदिर यह,
तुम्हारा देखा भाला है।

कहीं उखल से बंद जाना,
कहीं ग्वालों के संग आना,
तुम्हारी बाल लीला ने,
अजब धोखे में डाला है।

मेरा गोपाल गिरधारी,
जमाने से निराला है,
रंगीला है रसीला है,
ना गोरा है ना काला है।



Mera gopal giradhari jamane se nirala he मेरा गोपाल गिरधारी ज़माने by Krishan Chandar Thakur ji

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इस वीडियो का मूल स्रोत Bhaktipath YouTube Channel है।
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मूल श्रेय Bhaktipath चैनल को ही है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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