ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो कबीर भजन
वी गला फँसावे आपणा, और पानी पिलावे और
घायल की गति और है, और औरन की गति और
जब प्रेम बाण ह्रदय लगा, तो रहा कबीरा ठोर
प्रेमी ढूँढ़त मैं फिरा, मोहे प्रेमी मिला न कोए
प्रेमी से प्रेमी मिले, तो विष अमृत होए
प्रेम छिपाया न छिपे, जा घट परकट होए
अगर मुख से बोले नहीं, तो ये नैन देत हैं रोए
ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
हो निर्धन का हो राम
राम जी
तम तो बादल हम मोरीया
रहांगा तमारा ही माए
तम तो बरसो तो हम बोलीया
अब म्हारा कईं हवाल
ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
राम राम
तम तो सरोवर हम मछली
रहांगा तमारा हो माए
तम जद सूको तो हम मरी जावां
अब म्हारा कईं हवाल
ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
राम राम
तम तो झरकट हम बेलड़ी
रहांगा तम से लिपटाए
तम जद सूको तो हम मरी जावां
अब म्हारा कईं हवाल
ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
राम राम
कहे हो कबीर धर्मदास से
सुण लीजो ध्यान धराए
गावे बजावे सुणे सांभड़े
हंसा सतलोक जाए
ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
'Aisi Mhaari Preet Nibhaavjo' by Arun Goyal
If you are a cloud, I'm a peacock
Entranced by you
When you shower, I sing
What would I be without you?
Stay true to my love, O Ram
This delicate song of love and surrender, is a softer, more vulnerable poetic voice from the Kabir tradition. Attributed to his disciple Dharamdas, the song is sung here in a satsang by Arun Goyal and mandali, prefaced by a series of beautiful dohas on the subject of love.
Tambura & Vocals: Arun Goyal
Manjiras & Co-Singers: Dilip & Ramakant Goyal
Manjiras: Kamal Singh Chauhan
Harmonium: Punjraj Parmar
Nagaari (Timki): Prahlad Goyal
Dholak: Totaram Badoliya
प्रेम ऐसा हो जो लोटे-डोर की तरह हो, खुद गले में फंस जाए लेकिन दूसरों को राहत दे। घायल पंछी की चाल अलग होती है, जब हृदय में प्रेम का बाण लग जाए तो बस ठहर जाना पड़ता है। बादल हो तो मोरिया की तरह नाचें, बरसने पर गीत गाएं, सूख जाएं तो क्या हाल होगा? सरोवर हो तो मछली बनी लिपटें, झरना हो तो बेलड़ी की तरह चिपकें। एक संत फरमाते थे, "प्रेमी मिले तो विष भी अमृत लगे, बस वो निभावना चाहिए।"
ये बंधन हमें दिखाता है कि निर्धन का भी राम है, जो हर रूप में साथ निभाए। प्रेम छिपे न छिपे, आंखें तो रो ही लें अगर मुंह बंद हो। सतलोक के हंस बनने का रास्ता यही है, गान-वाद्य से ऊपर उठकर। जीवन की हर सांस में ये भाव जगाएं, तो सब कुछ सुंदर लगेगा। आइए, ऐसी प्रीत निभाएं जो दिल को हमेशा जीवंत रखे। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राम जी की।
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Author - Saroj Jangir
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