कवि कबीर नाचु रे मेरो मन नट होय ज्ञान के ढोल बजाय रैन दिन सब्द सुने सब कोई राहू केतु नवग्रह नाचे जमपुर आनँद होई
नाचु रे मेरो मन... छापा तिलक लगाए बाँस चढ़ि होई रहु जग से न्यारा सहस कला कर मन मेरो नाचे रीझे सिरजनहारा नाचु रे मेरो मन... जो तुम कूद जाओ भवसागर कला बदाऊं में तेरो कहे कबीर, सुनो भाई साधो हो रहु सतगुरु चेरो
Kabir Bhajan Lyrics in Hindi
नाचु रे मेरो मन...
'Naachu Re Mero Mann' by Bindhumalini & Vedanth
Naachu Re Mero Mann POET Kabir Naachu re mero mann nat hoye
Gyaan ke dhol bajaaye rain din Sabd sune sab koi Raahu Ketu navgrah naache Jampur aanand hoi Naachu re… Chhaapa tilak lagaaye baans chadhhi Hoi rahu jag se nyaara Sahas kala kar mann mero naache Reejhe sirjanhaara Naachu re… Jo tum kood jaao bhavsaagar Kala badaaun mein tero Kahe Kabir, suno bhai saadho Ho rahu satguru chero Naachu re…
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