तुस्सी बोले नई अस्सी डोले नई कान्हा नाळ भजन
तुस्सी बोले नई अस्सी डोले नई कान्हा नाळ भजन
तुस्सी बोले नई अस्सी डोले नई,
तुस्सी बोले नई अस्सी डोले नई,
कान्हा नाळ दुखड़े ओले नई,
गल नाळ रुसदे कान्हा तों,
कुछ पुछण नूं जी करदा ए,
गल नाळ रुसदे कान्हा तों,
कुछ पुछण नूं जी करदा ए,
सारी उमर मनोंदिया लंग गई ए ,
अज्ज मेरा हँसण नूं जी करदा ए,
सारी उमर मनोंदिया लंग गई ए ,
अज्ज मेरा हँसण नूं जी करदा ए,
जिन्नू जां तों जांदा चाह्नि आ,
जिन्नू रब्ब दे वाङ्गु धीआंदि आ,
जिन्नू देख देख के जिनि आ,
जिन्नू सबतों पई लुखोन्दी आ,
जिन्नू जां तों जांदा चाह्नि आ,
जिन्नू रब्ब दे वाङ्गु धीआंदि आ,
जिन्नू देख देख के जिनि आ,
जिन्नू सबतों पई लुखोन्दी आ,
तेनु लबिया अपने आप नूं गवां के,
अज्ज मेरा लुकण नूं जी करदा,
सारी उमर मनोंदिया लंग गई ए ,
अज्ज मेरा हँसण नूं जी करदा ए,
तेरे पीछे पीछे आंदि रही,
तेन्नु मिन्नता नाळ मनावंदी रही,
हत्थ कन्ना नूं भी लांदी रही,
ना मंनिया ते तरले पोंदी रही,
ना मंनिया ते तरले पोंदी रही,
हूँण झूठा तडपाण लई,
दो घडिया रुसँण नूं जी करदा,
हूँण झूठा तडपाण लई,
दो घडिया रुसँण नूं जी करदा,
सारी उमर मनोंदिया लंग गई ए ,
अज्ज मेरा हँसण नूं जी करदा ए,
तुसी बोले नहीं ऐसी डोले नहीं !! Tusi Bole Nahi Asi Dole Nahi !! Krishna Bhajan !! Sadhvi Purnima JI
Singer - Sadhvi Purnima Ji
Krishna Bhajan :-तुसी बोले नहीं ऐसी डोले नहीं
Lyrics :- Traditional
Music Label :- Saawariya
Digital Partner :- Vianet Media Pvt. Ltd
Krishna Bhajan :-तुसी बोले नहीं ऐसी डोले नहीं
Lyrics :- Traditional
Music Label :- Saawariya
Digital Partner :- Vianet Media Pvt. Ltd
कान्हा जब रूठ जाता है तो दिल में एक अजीब-सी खामोशी छा जाती है। सारी उमर मनाते-मनाते बीत गई, मिन्नतें कीं, तरले किए, हाथ-पैर जोड़े, पर वो मन नहीं माना। अब थक गई हूँ उस रोने-धोने से, उस बार-बार माफी माँगने से। आज तो बस जी करता है थोड़ा रूठ जाऊँ, थोड़ा मनमौजी बन जाऊँ, देखूँ तो सही वो कितना तड़पता है। झूठा तड़पाना हो या सच, पर दो घड़ी के लिए ही सही, उसकी आँखों में वो बेचैनी देख लूँ जो मैंने सालों से सहन की है।
जिसे रब की तरह ध्याने लगाए बैठी थी, जिसे देख-देखकर जीना सीखा था, जिसके लिए खुद को भुला दिया था – आज वो मिल गया तो लगता है खुद को खोकर ही पाया है। अब जी करता है छुप जाऊँ, उसकी तलाश में थोड़ा घूमने दूँ। सारी उमर मनाते बीत गई, अब हँसने का मन है – खुलकर, बिंदास, बिना किसी डर के। क्योंकि रूठना भी तो प्यार का एक हिस्सा है, और कभी-कभी रूठकर ही पता चलता है कि कितना गहरा वो लगाव है।
जिसे रब की तरह ध्याने लगाए बैठी थी, जिसे देख-देखकर जीना सीखा था, जिसके लिए खुद को भुला दिया था – आज वो मिल गया तो लगता है खुद को खोकर ही पाया है। अब जी करता है छुप जाऊँ, उसकी तलाश में थोड़ा घूमने दूँ। सारी उमर मनाते बीत गई, अब हँसने का मन है – खुलकर, बिंदास, बिना किसी डर के। क्योंकि रूठना भी तो प्यार का एक हिस्सा है, और कभी-कभी रूठकर ही पता चलता है कि कितना गहरा वो लगाव है।
