जळ जमना रो पाणी कइया ल्याऊं रसिया सोंग

जळ जमना रो पाणी कइया ल्याऊं ओ रसिया राजस्थानी सोंग

 
जळ जमना रो पाणी कइया ल्याऊं ओ रसिया लिरिक्स Jal Jamana Ro Paani Kaiya Lyau O Rasia Lyrics

जळ जमना रो पाणी कइया ल्याऊं ओ रसिया,
पतली कमर म्हारी लुळ लुळ जाय,
पतली कमर म्हारी लुळ लुळ जाय,

छोटोड़ी नणद म्हारी पाणी कोणी लावे,
बां घरां बैठी हुकम चलावे ओ रसिया,
पतली कमर म्हारी लुळ लुळ जाय,
पतली कमर म्हारी लुळ लुळ जाय,

सर पर घड़लो घड़े पर मटकी,
मटकी ऊपर कलसो कोनी चाले ओ रसिया,
पतली कमर म्हारी लुळ लुळ जाय,
पतली कमर म्हारी लुळ लुळ जाय,
ऊँची ऊँची पाळ घड़ो कोनी डूबे,
बीच में जाऊं तो डर लागे ओ रसिया,
पतली कमर म्हारी लुळ लुळ जाय,
पतली कमर म्हारी लुळ लुळ जाय,
 

Most Popular Rajasthani Folk Song | Jal Jamna Ro Pani | Seema Mishra | Veena Music
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Song: Jal Jamna Ro Pani
Album: Kuve Par Aekali 1
Language: Marwari (Rajasthani)
Produced By: K.C.Maloo (Veena Music Pvt. Ltd., Jaipur, Rajasthan, India)
Music Directed By Nirmal Mishra 
Singer: Seema Mishra
Label: Veena Music
Copyright: Oriental Audio Visual Electronics
Release Date: 1-Jan-2002
 
मानव की सौंदर्य श्रंगार और प्रेम भरी भावनाओं की अभिव्यक्ति का सबसे शसक्त माध्यम है लोक गीत , और "वीणा" ने हमेशा प्रयास किया है कि आपकी भावनाओं से ओतपोत पारम्परिक लोक गीत आपके सामने प्रस्तुत करें । लोकगीतों की यही तो खास बात है कि वो हमारी संस्कृति हमारी धरोहर से जुड़े होते हैं। और " वीणा" ने हमेशा इन्ही सब बातों को ध्यान में रखा है, और अपने लोक गीतों में हमेशा उन्ही किस्से कहानियों को दिखाया है जो आप हमेशा से अपने आस पास देखते या सुनते आये हैं।

गीत " कुवे पर ऐकली" में नायिका की शादी कम उम्र में हो जाती है ,और वो पीहर आने पर वो अपने पति को याद करती है ,और ये यादें उसे बार बार खो जाने पर मजबुर करती हैं ।
गीत " कुवे पर ऐकली" को "सीमा मिश्रा " ने गाया है।

गीत में पुरानी परम्पराओं की जबरदस्त छवि दिखाई गई है , गौरी और उसके नृत्य का भी अति सुंदर चित्रण दिखाया गया है। गीत में गौरी के भावों को व्यक्त किया है कि कैसे वो अपने मायके में अपने साजन को याद कर रही है । गीत के माध्यम से नई नवेली दुल्हन के मन का भाव प्रकट किया गया है कि वो कैसे साजन की याद में सखी सहेलियों के बीच भी अकेली है । कैसे वो कुवे पर खड़ी गीत गा रही है ,और याद कर रही है अपनी ननद को अपने पति को और अपने इन मन के भावों को गीत में व्यक्त कर रही है कि कैसे वो सबके साथ होते हुए भी अकेलापन महसुस कर रही है। गीत के अंत मे साजन से गौरी के मिलन का एक बहुत सुंदर चित्रण है । लोकगीतों की यही तो अहम बात है कि वो एक व्यक्ति के भावों को बड़ी आसानी से व्यक्त कर देते हैं। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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