झिम झिम बरसे अमृत धार भजन
झिम झिम बरसे अमृत धार भजन
झिम झिम बरसे अमृत धार,
गुरु नानक ने लिया अवतार,
विच ननकाने दे आया है,
नानकी दा वीर,
धन धन माता जी ने बाल ऐसा जाया,
डोला दाई ने पहला दर्शन पाया,
हो गई चरना तो बलिहार,
मथा चूमे सो सो वार,
विच ननकाने दे आया है,
नानकी दा वीर,
डोला दाई ने जा के कालू जी नूं दसिया,
रब तेरे घर आया खिड खिड हस्या,
कर लो चल के दीदार,
आया खुद निरंकार ,
विच ननकाने दे आया है,
नानकी दा वीर,
गुरु नानक ने लिया अवतार,
विच ननकाने दे आया है,
नानकी दा वीर,
धन धन माता जी ने बाल ऐसा जाया,
डोला दाई ने पहला दर्शन पाया,
हो गई चरना तो बलिहार,
मथा चूमे सो सो वार,
विच ननकाने दे आया है,
नानकी दा वीर,
डोला दाई ने जा के कालू जी नूं दसिया,
रब तेरे घर आया खिड खिड हस्या,
कर लो चल के दीदार,
आया खुद निरंकार ,
विच ननकाने दे आया है,
नानकी दा वीर,
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श्री गुरु नानक देव जीवनी \ जन्म साखी - ll GURU NANAK DEV JI KI JANAM SAAKHI
Jhim Jhim Barse Amrit Dhaar,
Guru Nanak Ne Liya Avtaar,
Vich Nankane De Aaya Hai,
Nanki Da Veer,
Dhan Dhan Mata Ji Ne Baal Aisa Jaya,
Dola Daayi Ne Pehla Darshan Paya,
Ho Gayi Charna To Balihaar,
Matha Choome So So Vaar,
Vich Nankane De Aaya Hai,
Nanki Da Veer,
Dola Daayi Ne Ja Ke Kalu Ji Nu Dasya,
Rab Tere Ghar Aaya Khid Khid Hasya,
Kar Lo Chal Ke Deedaar,
Aaya Khud Nirankar,
Vich Nankane De Aaya Hai,
Nanki Da Veer.
Guru Nanak Ne Liya Avtaar,
Vich Nankane De Aaya Hai,
Nanki Da Veer,
Dhan Dhan Mata Ji Ne Baal Aisa Jaya,
Dola Daayi Ne Pehla Darshan Paya,
Ho Gayi Charna To Balihaar,
Matha Choome So So Vaar,
Vich Nankane De Aaya Hai,
Nanki Da Veer,
Dola Daayi Ne Ja Ke Kalu Ji Nu Dasya,
Rab Tere Ghar Aaya Khid Khid Hasya,
Kar Lo Chal Ke Deedaar,
Aaya Khud Nirankar,
Vich Nankane De Aaya Hai,
Nanki Da Veer.
“Suni Pukar Datar Prabh
Guru Nanak Jag Maahi Pathaya”
Guru Nanak Jag Maahi Pathaya”
BHAJAN
TAKE-:Jhim Jhim Barse Amrat Dhar
Guru Nanak Ne Liya Avtar
Vich Te Aaya Hai Nanaki Da Veer
1. Dhan Dhan Mataji Ne Baal Aisa jaya
Daula Dayi Ne Pahla Darshan Paya
Hogayi Charana To Balihar, Mattha Chume Sau Sau Baar
Vich Nankane de Aaya Hai Nanaki Da Veer.
2. Daula Dayi Ne Jake Kaaluji Nu Daseya
Rab Tere Ghar Aaya Khil Khil Hanseya
Karlo Chal Ke Deedar Aaya khud Nirankaar
Vich Nankane Te Aaya Hai Nanaki Da Veer.
3. JAGTARAN LAYI SATGURU AAYA
APNE SEWAK NU PAAR LAGAYAA
SUN LI BHAGTA DI PUKAAR JAG
VICH AAYA HAI AVTAAR
“Suni Pukar Datar Prabh
Guru Nanak Jag Maahi Pathaya”
TAKE-:Jhim Jhim Barse Amrat Dhar
Guru Nanak Ne Liya Avtar
Vich Te Aaya Hai Nanaki Da Veer
1. Dhan Dhan Mataji Ne Baal Aisa jaya
Daula Dayi Ne Pahla Darshan Paya
Hogayi Charana To Balihar, Mattha Chume Sau Sau Baar
Vich Nankane de Aaya Hai Nanaki Da Veer.
2. Daula Dayi Ne Jake Kaaluji Nu Daseya
Rab Tere Ghar Aaya Khil Khil Hanseya
Karlo Chal Ke Deedar Aaya khud Nirankaar
Vich Nankane Te Aaya Hai Nanaki Da Veer.
3. JAGTARAN LAYI SATGURU AAYA
APNE SEWAK NU PAAR LAGAYAA
SUN LI BHAGTA DI PUKAAR JAG
VICH AAYA HAI AVTAAR
“Suni Pukar Datar Prabh
Guru Nanak Jag Maahi Pathaya”
गुरु नानक देव जी का जीवन और उनके उपदेश सिखों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहे हैं। इस भजन में गुरु नानक देव के अवतार और उनके द्वारा किए गए कार्यों का चित्रण किया गया है। गुरु नानक देव को जगत का उद्धारक और समाज के सुधारक के रूप में देखा जाता है। उनका व्यक्तित्व दार्शनिक, योगी, कवि और धर्म-सुधारक का मिला-जुला रूप था। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर लोगों को एकता, प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया। भजन में यह भी वर्णित है कि कैसे गुरु नानक देव ने अपनी अवतार की शुरुआत की और दुनिया को अमृतमय उपदेश दिए। उनका जीवन निराकार परमात्मा के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। इस भजन में गुरु नानक देव के आशीर्वाद से जीवन में शांति, सुख और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। भजन में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार माता जी और डोला दाई ने गुरु नानक देव का दर्शन किया और उनके चरणों में श्रद्धा व्यक्त की। गुरु नानक देव के प्रति यह भक्ति, श्रद्धा और उनके द्वारा दी गई उपदेशों की महिमा को इस भजन में सुंदरता से चित्रित किया गया है।
जब मन में विश्वास होता है कि ईश्वर ही अवलंब है, तो जीवन का हर पल एक नई जागरूकता, सकारात्मकता और शक्ति से भरा होता है।
उस विश्वास की गहराई इस बात में है कि यह निरंतर रुका हुआ नहीं रहता, बल्कि समय, परिस्थिति और अनुभव के साथ मजबूत होता जाता है। भक्त अपने सब कष्टों, सुख-दुख, विफलताओं और सफलताओं को ईश्वर के चरणों में अर्पित कर आत्मिक शांति प्राप्त करता है। जब मनुष्य अपने ईश्वर पर भरोसा जताता है, तो उसकी आत्मा के अंधकार-दिन भी प्रकाश में बदल जाते हैं।
उस विश्वास की गहराई इस बात में है कि यह निरंतर रुका हुआ नहीं रहता, बल्कि समय, परिस्थिति और अनुभव के साथ मजबूत होता जाता है। भक्त अपने सब कष्टों, सुख-दुख, विफलताओं और सफलताओं को ईश्वर के चरणों में अर्पित कर आत्मिक शांति प्राप्त करता है। जब मनुष्य अपने ईश्वर पर भरोसा जताता है, तो उसकी आत्मा के अंधकार-दिन भी प्रकाश में बदल जाते हैं।
ਸਭੁ ਕਿਛੁ ਘਰ ਮਹਿ ਬਾਹਰਿ ਨਾਹੀ ॥
ਬਾਹਰਿ ਤੋਲੈ ਸੋ ਭਰਮਿ ਭੁਲਾਹੀ ॥
ਗੁਰ ਪਰਸਾਦੀ ਜਿਨੀ ਅੰਤਰਿ ਪਾਇਆ ਸੋ ਅੰਤਰਿ ਬਾਹਰਿ ਸੁਹੇਲਾ ਜੀਉ ॥੧॥
सब कुछ इसी शरीर (आत्म-घर) में है, बाहर कुछ भी नहीं।
जो बाहर खोजता है, वह भ्रम में भटकता है।
जिसे गुरु की कृपा से परमात्मा भीतर मिलता है, उसके अंदर और बाहर दोनों में सुख और शांति बसती है।
Everything is within the home of the self; nothing lies outside.
Those who search outside are deluded by illusion.
By the Guru’s Grace, one who finds the Divine within becomes peaceful and content, both inwardly and outwardly. ||1||
ਝਿਮਿ ਝਿਮਿ ਵਰਸੈ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਧਾਰਾ ॥
ਮਨੁ ਪੀਵੈ ਸੁਨਿ ਸਬਦੁ ਬੀਚਾਰਾ ॥
ਅਨਦ ਬਿਨੋਦ ਕਰੈ ਦਿਨੁ ਰਾਤੀ ਸਦਾ ਸਦਾ ਹਰਿ ਖੇਲਾ ਜੀਉ ॥੨॥
धीरे-धीरे, भीतर अमृत की धार बरसती है।
मन उस अमृत को शबद-स्मरण और विचार द्वारा पीता है।
जो मन इस रस में डूब जाता है, वह दिन-रात प्रभु के आनंद में मग्न रहता है।
Gently, drop by drop, the stream of nectar rains within.
The mind drinks it in by listening and reflecting on the Word of the Shabad.
It remains ever joyful, absorbed in Divine play day and night. ||2||
ਬਾਹਰਿ ਤੋਲੈ ਸੋ ਭਰਮਿ ਭੁਲਾਹੀ ॥
ਗੁਰ ਪਰਸਾਦੀ ਜਿਨੀ ਅੰਤਰਿ ਪਾਇਆ ਸੋ ਅੰਤਰਿ ਬਾਹਰਿ ਸੁਹੇਲਾ ਜੀਉ ॥੧॥
सब कुछ इसी शरीर (आत्म-घर) में है, बाहर कुछ भी नहीं।
जो बाहर खोजता है, वह भ्रम में भटकता है।
जिसे गुरु की कृपा से परमात्मा भीतर मिलता है, उसके अंदर और बाहर दोनों में सुख और शांति बसती है।
Everything is within the home of the self; nothing lies outside.
Those who search outside are deluded by illusion.
By the Guru’s Grace, one who finds the Divine within becomes peaceful and content, both inwardly and outwardly. ||1||
ਝਿਮਿ ਝਿਮਿ ਵਰਸੈ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਧਾਰਾ ॥
ਮਨੁ ਪੀਵੈ ਸੁਨਿ ਸਬਦੁ ਬੀਚਾਰਾ ॥
ਅਨਦ ਬਿਨੋਦ ਕਰੈ ਦਿਨੁ ਰਾਤੀ ਸਦਾ ਸਦਾ ਹਰਿ ਖੇਲਾ ਜੀਉ ॥੨॥
धीरे-धीरे, भीतर अमृत की धार बरसती है।
मन उस अमृत को शबद-स्मरण और विचार द्वारा पीता है।
जो मन इस रस में डूब जाता है, वह दिन-रात प्रभु के आनंद में मग्न रहता है।
Gently, drop by drop, the stream of nectar rains within.
The mind drinks it in by listening and reflecting on the Word of the Shabad.
It remains ever joyful, absorbed in Divine play day and night. ||2||
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Author - Saroj Jangir
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