साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी नाम भजन
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम भजन
अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
जीवन का श्रृंगार है प्रीतम, माँग का सिन्दूर,
माँग का सिन्दूर,
जीवन का श्रृंगार है प्रीतम, माँग का सिन्दूर,
प्रीतम की नज़रों से गिर कर, जीना है किस काम,
प्रीतम की नज़रों से गिर कर, जीना है किस काम,
साँसों की,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
बन गया एक ही रूप,
प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप,
प्रेम की माला जपते जपते, आप बनी मैं श्याम,
प्रेम की माला जपते जपते, आप बनी मैं श्याम,
साँसों की,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
प्रीतम का कुछ दोष नहीं है वो तो है निर्दोष,
वो तो है निर्दोष,
अपने आप से बातें कर के हो गयी मैं बदनाम,
अपने आप से बातें कर के हो गयी मैं बदनाम,
साँसों की,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
प्रेम पियाला जब से पिया है, जी का है ये हाल,
जी का है ये हाल,
प्रेम पियाला जब से पिया है, जी का है ये हाल,
अंगारों पे नींद आ जाए, काँटों पे आराम,
अंगारों पे नींद आ जाए, काँटों पे आराम,
साँसों की,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
SANSON KI MALA PE (LYRICAL)- Vidhi Sharma | Nusrat Fateh Ali Khan #SupertoneDigital
► Song: Sanson Ki Mala Pe Simru Main Pee Ka Naam
► Singer: Vidhi Sharma
► Music: Lovely Sharma
► Recording Studio: Smart Digital ( 9711868600 / 8700635937 )
जीवन का श्रृंगार प्रीतम ही है, उनकी नजरों से गिरना मृत्यु के समान है; प्रेम-प्याले पीने से अंगारों पर नींद और काँटों पर आराम मिल जाता है, जो परम भक्ति की अवस्था दर्शाता है। प्रीतम निर्दोष हैं, दोष भक्त के मन की कल्पनाओं में है, फिर भी साँस-प्रति साँस नाम-सिमरन ही मुक्ति का मार्ग है। जहाँ भक्त स्वयं को श्याम में विलीन कर लेता है—"प्रेम की माला जपते जपते आप बनी मैं श्याम"—जो मीरा या सूरदास जैसी संत-परंपरा की याद दिलाता है। नित्य जप से मन शुद्ध होता है, प्रेम की एकाग्रता बढ़ती है तथा कृष्ण-कृपा प्राप्त होती है।
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Author - Saroj Jangir
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