दीवाना मैं तो मोहन का जग समझे मैं बौराना
दीवाना मैं तो मोहन का जग समझे मैं बौराना
दीवाना मैं तो मोहन का
दीवाना मैं तो मोहन का
जग समझे मैं बौराना
दीवाना मैं तो मोहन का।
वो राधा रानी वाले हैं
आँखों में काजल डाले हैं
आँखों की चितवन है ऐसे
जैसे छलके पैमाना
दीवाना मैं तो मोहन का।
वो मोर मुकुटिया वाले हैं
कानों में कुंडल डाले हैं
चेहरे की छटा देखी जबसे
मैं हो गया मस्ताना
दीवाना मैं तो मोहन का।
वो गीता गाने वाले हैं
ऊँगली पर चक्र सँभाले हैं
मुरली की तानें सुन सुन कर
हूँ खुद से अंजाना
दीवाना मैं तो मोहन का।
मीरा का गिरधर गोपाला
जो विष को अमृत कर डाला
गीता का ज्ञान सुनाया था
जब अर्जुन अकुलाना
दीवाना मैं तो मोहन का।
वो रास रचाने वाले हैं
नख में गिरिराज सँभाले
राजेन्द्र कहे है राधावर
कुछ दे दो नजराना
दीवाना मैं तो मोहन का।
दीवाना मैं तो मोहन का
जग समझे मैं बौराना
दीवाना मैं तो मोहन का।
दीवाना मैं तो मोहन का
जग समझे मैं बौराना
दीवाना मैं तो मोहन का।
वो राधा रानी वाले हैं
आँखों में काजल डाले हैं
आँखों की चितवन है ऐसे
जैसे छलके पैमाना
दीवाना मैं तो मोहन का।
वो मोर मुकुटिया वाले हैं
कानों में कुंडल डाले हैं
चेहरे की छटा देखी जबसे
मैं हो गया मस्ताना
दीवाना मैं तो मोहन का।
वो गीता गाने वाले हैं
ऊँगली पर चक्र सँभाले हैं
मुरली की तानें सुन सुन कर
हूँ खुद से अंजाना
दीवाना मैं तो मोहन का।
मीरा का गिरधर गोपाला
जो विष को अमृत कर डाला
गीता का ज्ञान सुनाया था
जब अर्जुन अकुलाना
दीवाना मैं तो मोहन का।
वो रास रचाने वाले हैं
नख में गिरिराज सँभाले
राजेन्द्र कहे है राधावर
कुछ दे दो नजराना
दीवाना मैं तो मोहन का।
दीवाना मैं तो मोहन का
जग समझे मैं बौराना
दीवाना मैं तो मोहन का।
दीवाना मैं तो मोहन का जग समझे
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मोहन के प्रेम में मन ऐसा डूब गया है कि दुनिया इसे बौरापन कहे, पर यह तो सच्चे प्रेम का राग है। उनकी एक मुस्कान, एक नजर मन को बेकरार कर देती है। राधा के प्रिय, आँखों में काजल सजाए, उनकी चितवन ऐसी है, मानो कोई जाम छलक रहा हो। वह नजरें मन को मदहोश कर देती हैं, और सारी दुनिया भूल जाती है।
मोर मुकुट सिर पर, कानों में कुंडल, मोहन का चेहरा ऐसी आभा लिए है कि उसे देखते ही मन मस्त हो जाता है। उनकी छवि मन में बस गई है, और उस एक झलक ने सारे संसार को फीका कर दिया। यह मस्ती ऐसी है, जो आत्मा को मुक्त कर देती है। गीता का उपदेश देने वाले, सुदर्शन चक्र को उँगली पर संभालने वाले, उनकी मुरली की तान सुनकर मन अपने आप से अनजान हो जाता है। वह धुन हर चिंता, हर विचार को भुला देती है, और मन बस उसी में रम जाता है, जैसे कोई और सत्य ही न हो।
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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