सांवरे से मिलने का सत्संग ही बहाना भजन
सांवरे से मिलने का सत्संग ही बहाना भजन
चलो सत्संग में चलें, हमें हरी गुण गाना है,
मेरे सांवरे से मिलने का,
मथुरा में ढूँढा तुझे, गोकुल में पाया है,
वृन्दावन की गलियों में, मेरे श्याम का ठिकाना है,
सांवरे से मिलने का, सत्संग ही बहाना है,
बाग़ों में ढूँढा तुझे, फूलों मे पाया है,
मोगरे की कलियोँ में, मेरे श्याम का ठिकाना है,
साँवरे से मिलने का, सतसंग ही बहाना है,
सखियों ने ढूँढा तुझे, गोपियों ने पाया है,
राधा जी के हृदय में, मेरे श्याम का ठीकाना है,
साँवरे से मिलने का, सत्संग ही बहाना है,
राधा ने ढूँढा तुझे, मीरा ने पाया है,
मैंने तुझे पा ही लिया, मेरे दिल में ठिकाना है,
साँवरे से मिलने का, सतसंग ही बहाना है,
महलों मे ढूँढा तुझे, झोपड़ी में पाया है,
सुदामा की कुटियाँ में, मेरे श्याम का बसेरा है,
साँवरे से मिलने का, सत्सङ्ग ही बहाना है,
मीरां पुकार रही, आओ मेरे गिरधारी,
विष भरे प्याले को, तुम्हें अमृत बनाना है,
साँवरे से मिलने का, सत्संग ही बहाना है,
चलो सत्संग में चलें, हमें हरी गुण गाना है,
साँवरे से मिलने का, सतसंग ही बहाना है,
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Song : Sanware Se Milne Ka Satsang Hi Bahana Hai
Album : Shri Krishn Satsang
Singer : Rakesh Kala
Music : Rakesh
Label : Brijwani Cassettes
Produced By : Sajal
जब सत्संग की महफिल सजती है, तो जैसे सारी दुनिया रुक जाती है और बस एक ही नाम गूँजने लगता है—सांवरे, श्याम, गिरधारी। मथुरा की गलियों से लेकर गोकुल की चौपालों तक, वृंदावन की कुटियों से बागों की कलियों तक—हर जगह वो मिल जाता है। फूलों में छिपा, मोगरे की महक में बसा, गोपियों के हृदय में विराजमान, राधा जी की आँखों में समाया। महलों की चकाचौंध में नहीं, सुदामा की झोपड़ी में वो बसेरा बनाता है, क्योंकि वो दिल की सच्ची पुकार सुनता है, दिखावे की नहीं।
मीरा की तरह पुकारो तो विष भी अमृत बन जाता है, क्योंकि सत्संग वो बहाना है जहाँ मिलन हो जाता है। सखियों ने ढूँढा, गोपियों ने पाया, राधा ने बसाया, और जो सच्चे मन से पुकारता है वो अपने दिल में ही पा लेता है। बस चल पड़ो सत्संग की ओर, हरी के गुण गाते-गाते, क्योंकि यही वो जगह है जहाँ सांवरे खुद आकर बैठ जाते हैं, मन को रंग भर देते हैं। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री श्याम जी की।
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Author - Saroj Jangir
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