गौरा राणी सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या भजन
गौरा राणी सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या भजन
मेरी जान मरण में आ रही सै,
किसा लोग नशेड़ी गल पड़ गया
यूँ ना बोले गौरा राणी,
सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या,
ल्या दे घोटा भर ला लौटा, प्यास बुझा दे भोळे की,
पीवण की तेरी लिमिट रही ना, बात यही सै रोळे की,
थोड़े में तेरा काम ना चाले, पार भोले तू लिमिट कर ग्या,
यूँ ना बोले गौरा राणी,
सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या,
राजी राजी प्यादे भंगियाँ क्यांते मूंड चढ़ावे सै,
दुनियाँ आवे हरिद्वार में मन्ने कभी न घुमावे सै,
कितने वादे हो लिए तेरे झूठ बोलण की हद कर ग्या,
यूँ ना बोले गौरा राणी,
सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या,
सिर मेरे जब भङ्ग चढ़ ज्यागी,आनद आवे घूमण में,
रज के पी ले मेरे भंडारी नाँच दिखाये सामण में,
भगत सतेंदर सतेंधर तेरा पुजारी,
राज मेहर कैसे छंद गढ़ ग्या,
यूँ ना बोले गौरा राणी,
सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या,
किसा लोग नशेड़ी गल पड़ गया
यूँ ना बोले गौरा राणी,
सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या,
ल्या दे घोटा भर ला लौटा, प्यास बुझा दे भोळे की,
पीवण की तेरी लिमिट रही ना, बात यही सै रोळे की,
थोड़े में तेरा काम ना चाले, पार भोले तू लिमिट कर ग्या,
यूँ ना बोले गौरा राणी,
सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या,
राजी राजी प्यादे भंगियाँ क्यांते मूंड चढ़ावे सै,
दुनियाँ आवे हरिद्वार में मन्ने कभी न घुमावे सै,
कितने वादे हो लिए तेरे झूठ बोलण की हद कर ग्या,
यूँ ना बोले गौरा राणी,
सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या,
सिर मेरे जब भङ्ग चढ़ ज्यागी,आनद आवे घूमण में,
रज के पी ले मेरे भंडारी नाँच दिखाये सामण में,
भगत सतेंदर सतेंधर तेरा पुजारी,
राज मेहर कैसे छंद गढ़ ग्या,
यूँ ना बोले गौरा राणी,
सामण का मेरे रंग चढ़ ग्या,
Full कावड़ Dj डांस भजन | गोरा रानी सावन का मेरे रंग चढ़ग्या | Sawan Shiv Dj Bhajan | Dj Bhajan
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Singer - Raju Hans & Sonia Raj
Label - Shyam Bhajan
Label - Shyam Bhajan
भोले बाबा के भंग के रंग में जब चढ़ जाता है तो सारा संसार अलग दिखने लगता है। गौरा राणी मुस्कुराती हुई कहती हैं – यूँ ना बोले, सामण का रंग चढ़ गया है। प्यास बुझाने को घोटा भर लौटा मंगवाते हैं, लेकिन भोले की लिमिट तो पार हो गई। थोड़े में काम नहीं चलता, पूरा नशा चढ़े तब आनंद आता है।
राजी-राजी प्यादे भंगियों को मूंड चढ़ाते हैं, दुनिया हरिद्वार घूमने जाती है पर इनके मन में तो भोले का ही हरिद्वार बसता है। कितने वादे किए, कितने झूठ बोले, लेकिन जब सिर पर भंग चढ़ जाती है तो घूमने में अनोखा आनंद आता है। नाच दिखाते हैं, भक्त सतेंदर जैसे पुजारी छंद गढ़ते हैं और मेहर की बारिश हो जाती है। भोले बाबा का यह रंग ऐसा है कि एक बार चढ़ जाए तो सारी दुनिया फीकी पड़ जाती है। मन हल्का हो जाता है, चिंताएं उड़ जाती हैं और बस डमरू की धुन और भंग की मस्ती में सब कुछ भूल जाता है। दया की नजर पड़ते ही सारा दुख मिट जाता है।
मैं जी जो रहा शिवा के सहारे भजन
भोलेबाबा गौरा जी की शादी वाली रात है
नैन अब खोलो ओ भोलेबाबा
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Author - Saroj Jangir
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