कद नजर मेहर दी पावेगा भजन

कद नजर मेहर दी पावेगा भजन

दिन चडीआ चल के छिप चलेआ हाले तक आस वी मुकी नही
देह बिन हडिया दा पिंजर गई पर नजब हाले तक रुकी नही
आसी आसा लाई बैठे आ कद खैर झोली विच पावेगा
जिंगदी दिया शामा ढल चालिया कद नजर मेहर दी पावेगा

इक तेरे हुकम दे अन्दर ही एह दुनिया सारी चलदी ऐ
तेरे हुकम च पैदा हुंडी ऐ तेरे हुकम नाल ख़ाक च रुलदी ऐ
एह बंजर बन गई जिन्दगी नु कद फूल आसा दा लावेंगा
जिंगदी दिया शामा ढल चालिया कद नजर मेहर दी पावेगा

फिर तो एह रात विछोड़े दी मुह साहमने अड़ के खड गई ऐ
इक पल वी लगदा पहर जेहा जींद विच विचाले अड़ गई ऐ
ना डूबे ते ना पार होये  डूबीआ नु आप तरावेंगा
जिंगदी दिया शामा ढल चालिया कद नजर मेहर दी पावेगा

बाबा नानक जी एक ओट तेरी होर सब सहारा मूक गए ने
मैं सुनिया पैंदा खैर ओहना जो दर तेरे ते झुक गाये ने
दर आ के खड़े भिखारी नु दस होर किना तरसावेंगा
जिंगदी दिया शामा ढल चालिया कद नजर मेहर दी पावेगा

ਦਿਨ ਚੜ੍ਹਿਆ ਚੱਲ ਕੇ ਛਿੱਪ ਚੱਲਿਆ, ਹਾਲੇ ਤੱਕ ਆਸ ਵੀ ਮੁੱਕੀ ਨਹੀਂ l
ਦੇਹ ਬਣ ਹੱਡੀਆਂ ਦਾ ਪਿੰਜਰ ਗਈ, ਪਰ ਨਬਜ਼ ਹਾਲੇ ਤੱਕ ਰੁੱਕੀ ਨਹੀਂ ll
ਅਸੀਂ ਆਸਾਂ ਲਾਈ ਬੈਠੇ ਆਂ ll, ਕਦ ਖ਼ੈਰ ਝੋਲੀ ਵਿੱਚ ਪਾਵੇਂਗਾ,
ਜਿੰਦਗੀ ਦੀਆਂ ਸ਼ਾਮਾਂ ਢੱਲ ਚੱਲੀਆਂ, ਕਦ ਨਜ਼ਰ ਮੇਹਰ ਦੀ ਪਾਵੇਂਗਾ ll

ਇੱਕ ਤੇਰੇ ਹੁਕਮ ਦੇ ਅੰਦਰ ਹੀ, ਏਹ ਦੁਨੀਆਂ ਸਾਰੀ ਚੱਲਦੀ ਏ l
ਤੇਰੇ ਹੁਕਮ 'ਚ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੀ ਏ, ਤੇਰੇ ਹੁਕਮ ਨਾਲ ਖ਼ਾਕ 'ਚ ਰਲ਼ਦੀ ਏ ll
ਏਹ ਬੰਜ਼ਰ ਬਣ ਗਈ ਜਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ll, ਕਦ ਫ਼ੁੱਲ ਆਸਾਂ ਦਾ ਲਾਵੇਂਗਾ,
ਜਿੰਦਗੀ ਦੀਆਂ ਸ਼ਾਮਾਂ ਢੱਲ ਚੱਲੀਆਂ, ਕਦ ਨਜ਼ਰ ਮੇਹਰ ਦੀ ਪਾਵੇਂਗਾ ll

ਫਿਰ ਤੋਂ ਏਹ ਰਾਤ ਵਿਛੋੜੇ ਦੀ, ਮੂੰਹ ਸਾਹਮਣੇ ਅੱਡ ਕੇ ਖੜ ਗਈ ਏ l
ਇੱਕ ਪਲ ਵੀ ਲੱਗਦਾ ਪਹਿਰ ਜੇਹਾ, ਜਿੰਦ ਵਿੱਚ ਵਿਚਾਲੇ ਅੜ੍ਹ ਗਈ ਏ ll
ਨਾ ਡੁੱਬੇ ਤੇ ਨਾ ਪਾਰ ਹੋਏ ll, ਡੁੱਬਦਿਆਂ ਨੂੰ ਆਪ ਤਰਾਵੇਂਗਾ,
ਜਿੰਦਗੀ ਦੀਆਂ ਸ਼ਾਮਾਂ ਢੱਲ ਚੱਲੀਆਂ, ਕਦ ਨਜ਼ਰ ਮੇਹਰ ਦੀ ਪਾਵੇਂਗਾ ll
 
ਬਾਬਾ ਨਾਨਕ ਜੀ ਇੱਕ ਓਟ ਤੇਰੀ, ਹੋਰ ਸਭ ਸਹਾਰੇ ਮੁੱਕ ਗਏ ਨੇ l
ਮੈਂ ਸੁਣਿਆ ਪੈਂਦੀ ਖ਼ੈਰ ਓਹਨਾਂ, ਜੋ ਦਰ ਤੇਰੇ ਤੇ ਝੁੱਕ ਗਏ ਨੇ ll
ਦਰ ਆ ਕੇ ਖੜੇ ਭਿਖਾਰੀ ਨੂੰ ll, ਦੱਸ ਹੋਰ ਕਿੰਨਾ ਤਰਸਾਵੇਂਗਾ,
ਜਿੰਦਗੀ ਦੀਆਂ ਸ਼ਾਮਾਂ ਢੱਲ ਚੱਲੀਆਂ, ਕਦ ਨਜ਼ਰ ਮੇਹਰ ਦੀ ਪਾਵੇਂਗਾ ll
ਅਪਲੋਡਰ- ਅਨਿਲਰਾਮੂਰਤੀਭੋਪਾਲ



kad Najar Meher Di Pawega | Baba Amrjeet Singh Ji | Galib Khurd Wale | Sukh films

ऐसे ही मधुर भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार सोंग्स को ढूंढें.
 

पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।

 
 
kad Najar Meher Di Pawega
Baba Amrjit Singh Ji 
Nanaksar Galib Khurd Wale
 
दिन चढ़ा और ढल गया, फिर भी आशा अभी तक पूरी नहीं हुई, शरीर हड्डियों का पिंजरा बन चुका है पर सांस अभी तक नहीं रुकी। हम आशा लगाए बैठे हैं कि कब तू अपनी झोली में खैर डालेगा, जिंदगी की शामें ढल रही हैं, कब मेहर की नजर फेरेगा। सारी दुनिया तेरे एक हुक्म में चल रही है, तेरे हुक्म से पैदा होती है और तेरे ही हुक्म से मिट्टी में मिल जाती है। यह जिंदगी बंजर हो गई है, कब आशाओं के फूल खिलाएगा। फिर यह जुदाई की रात मुंह साफ करके सामने खड़ी हो गई है, एक पल भी घड़ी जैसा लगता है, न डूब रहे हैं न पार हो रहे हैं, डूबते हुओं को तू खुद तैराएगा। बाबा नानक जी, तेरी ही एक ओट है, बाकी सब सहारे खत्म हो गए। मैंने सुना है कि उन्हें खैर मिलती है जो तेरे दर पर झुक जाते हैं, अब दर पर खड़े इस भिखारी को और कितना तरसाएगा? जिंदगी की शामें ढल रही हैं, कब मेहर की नजर पड़ेगी। 
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर,हरियाणवी सोंग्स गढ़वाली सोंग्स लिरिक्स आध्यात्मिक भजन गुरु भजन, सतगुरु भजन का संग्रह। इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें

Next Post Previous Post