मैनू बन के वकील छुड़ा लै भजन

मैनू बन के वकील छुड़ा लै भजन

मेनूं, बन के, वकील, छुड़ा ले,
कैदी हां मैं, जनमां दा।
ओ कैदी हां मैं, जनमां दा,
ओ कैदी हां मैं, जनमां दा।
ओ मेनूं, चौरासी दे, गेड़ तों बचा ले,
कैदी हां मैं, जनमां दा।
मेनूं, बन के, वकील, छुड़ा ले।।

जनम~जनम दा, मैं हां पापी।
दर तेरे तों, मंगदा हां माफी।
ओ आज, मेरे उत्ते, रहम कमा ले,
कैदी हां मैं, जनमां दा।
मेनूं, बन के, वकील, छुड़ा ले।।

भुल गई ऐ, याद मैनूं, प्यारिये तेरी।
ओ विषयां~विकारां ने, मत मारी मेरी।
ओ मेरी, सुरत, शब्द नाल ला ले,
कैदी हां मैं, जनमां दा।
मेनूं, बन के, वकील, छुड़ा ले।।

सिर ते मौत, मुकद्दमा ऐ मेरा।
चरण~कमल विच, दे दियो डेरा।
ओ मेरी, आखिरी, तारीख भुगता ले,
कैदी हां मैं, जनमां दा।
मेनूं, बन के, वकील, छुड़ा ले।।

तैनूं मेरे, करमां दा, पूरा ही ज्ञान ऐ।
तूं ही, मेरा जज ते, वकील मेहरबान ऐ।
ओ मेनूं, जनमां दी, जेल तों छुड़ा ले,
कैदी हां मैं, जनमां दा।
मेनूं, बन के, वकील, छुड़ा ले।।

सतगुरू, पेश ना, जांदी हुण मेरी।
चौरासी दे, समुंदर विच, फस गई बेड़ी।
ओ चप्पू, हाथ तेरे, पार लगा ले,
कैदी हां मैं, जनमां दा।
मेनूं, बन के, वकील, छुड़ा ले।।



👏👏मैनूं बन के वकील छुड़ा लेयो कैदी हां मैं जन्मा दा 💯💯 बहुत ही प्यारा भजन 💐💐 जय हो 🙏🙏

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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