कौन जाने गुण तेरे ऊंचे अपार बेअंत स्वामी भजन

कौन जाने गुण तेरे ऊंचे अपार बेअंत स्वामी भजन

पूर्ण परमात्मा के नाम का सुमिरण अत्यंत प्रभावी होता है जिसके सुमिरण मात्र से ही अनेकों जन्मों के कर्मों के फल कटते हैं। उसके गुणों का किसी को पूर्ण रूप से पता नहीं है। उसके नाम के सुमिरन को गाने और सुनने से पापो का नाश होता है। पत्थर को तैराने वाले ऐसे पूर्ण परमात्मा की शरण में नानक गुरुदेव जी हैं।
 
कौन जाने गुण तेरे लिरिक्स Koun Jaane Gun Tere Bhajan Lyrics

तेरे गुण बहुते, मैं एक ना जाणिया,
मैं मूरख किछ दीजै,
धन नानक, सुण मेरे साहिबा,
दुबदा पत्थर लीजै,

कौन जाने गुण तेरे,
कौन जाने गुण तेरे,
ऊंचे अपार बेअंत स्वामी,
ऊंचे अपार बेअंत स्वामी,
कौन जाने गुण तेरे,
कौन जाने गुण तेरे,

गावत ऊधरे सुनते ऊधरे,
गावत ऊधरे सुनते ऊधरे,
बिनसे पाप घनेरे,
ऊंचे अपार बेअंत स्वामी,
कौन जाने गुण तेरे,
कौन जाने गुण तेरे

पशु परेत मुगद को तारे,
पशु परेत मुगद को तारे,
पाहन पार उतारे,
ऊंचे अपार बेअंत स्वामी,
कौन जाने गुण तेरे,
कौन जाने गुण तेरे

नानक दास तेरी सरनाई,
नानक दास तेरी सरनाई,
सदा सदा बलिहारै,
ऊंचे अपार बेअंत स्वामी,
कौन जाने गुण तेरे,
कौन जाने गुण तेरे,

Kaun Jaane Gun Tere Bhai Satwinder Singh - Topic

Tere Gun Bahute, Main Ek Na Jaaniya,
Main Moorakh Kichh Deejai,
Dhan Naanak, Sun Mere Saahiba,
Dubada Patthar Leejai,

Kaun Jaane Gun Tere,
Kaun Jaane Gun Tere,
Oonche Apaar Beant Svaamee,
Oonche Apaar Beant Svaamee,
Kaun Jaane Gun Tere,
Kaun Jaane Gun Tere,

Gaavat Oodhare Sunate Oodhare,
Gaavat Oodhare Sunate Oodhare,
Binase Paap Ghanere,
Oonche Apaar Beant Svaamee,
Kaun Jaane Gun Tere,
Kaun Jaane Gun Tere

Pashu Paret Mugad Ko Taare,
Pashu Paret Mugad Ko Taare,
Paahan Paar Utaare,
Oonche Apaar Beant Svaamee,
Kaun Jaane Gun Tere,
Kaun Jaane Gun Tere

Naanak Daas Teree Saranaee,
Naanak Daas Teree Saranaee,
Sada Sada Balihaarai,
Oonche Apaar Beant Svaamee,
Kaun Jaane Gun Tere,
Kaun Jaane Gun Tere ,
 
यह शबद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से लिया गया है, जो गुरु अर्जन देव जी द्वारा रचित है (अंग 802 पर)। इसमें भक्त अपनी अज्ञानता स्वीकार करते हुए परमात्मा के अनंत गुणों की महिमा का वर्णन करता है और उनकी शरण में आने की प्रार्थना करता है।
हे मेरे स्वामी! तेरे गुण बहुत अधिक हैं, इतने असंख्य और अनंत कि मैं उनमें से एक भी नहीं जान पाया। मैं तो पूरी तरह मूर्ख हूं, इसलिए हे प्रभु! इस मूर्ख को कुछ भी (ज्ञान, भक्ति या कृपा) प्रदान कर दो। हे धन नानक (गुरु नानक जी के रूप में), हे मेरे साहिबा! मेरी सुनो, इस दुबले-पतले (कमजोर, असहाय) पत्थर जैसी आत्मा को भी उठा लो और पार कर दो।
कौन जाने तेरे गुण? कौन जान सकता है तेरे गुण? हे ऊंचे, अपार, बेअंत स्वामी! तेरे गुणों को कौन समझ सकता है? कौन जान सकता है तेरे गुण?
जो लोग तेरे गुण गाते हैं, वे उद्धार पा जाते हैं; जो सुनते हैं, वे भी उद्धार हो जाते हैं। उनके घनेरे पाप नष्ट हो जाते हैं। हे ऊंचे, अपार, बेअंत स्वामी! कौन जाने तेरे गुण?
तू पशुओं, प्रेतों (भूत-प्रेत), मूढ़ों (मुग्ध, अज्ञानी) को भी तार देता है। यहां तक कि पत्थरों (निर्जीव, बेजान) को भी पार उतार देता है। हे ऊंचे, अपार, बेअंत स्वामी! कौन जाने तेरे गुण?
नानक दास तेरी शरण में आया है। नानक तेरा दास सदा-सदा तेरे बलिहारी जाता है, तेरे चरणों में समर्पित रहता है। हे ऊंचे, अपार, बेअंत स्वामी! कौन जाने तेरे गुण? कौन जाने तेरे गुण?
यह शबद भक्ति, विनम्रता और परमात्मा की असीम कृपा की भावना से भरा है, जो बताता है कि ईश्वर के गुण अनंत हैं, कोई पूरी तरह नहीं जान सकता, लेकिन उनकी भक्ति और शरण से हर कोई (यहां तक कि सबसे नीच समझा जाने वाला भी) उद्धार पा सकता है। 
 
Provided to YouTube by Super Cassettes Industries Limited
Kaun Jaane Gun Tere · Bhai Satwinder Singh (Delhi Wale) | Bhai Harvinder Singh Ji (Delhi Wale)
Kaun Jane Gun Tere
℗ Super Cassettes Industries Limited
Released on: 2004-04-16
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